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मधुबनी: रोजगार के लिए अधिकारी के पैर पकड़ने को मजबूर हुआ मजदूर, नौ महीने से काम का इंतजार

मधुबनी के लखनौर प्रखंड कार्यालय में एक मजदूर ने रोजगार की मांग को लेकर अधिकारी का पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगा। इसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

11 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
मधुबनी: रोजगार के लिए अधिकारी के पैर पकड़ने को मजबूर हुआ मजदूर, नौ महीने से काम का इंतजार
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बिहार के मधुबनी जिले से एक विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां लखनौर प्रखंड कार्यालय में एक मजदूर अपनी व्यथा सुनाते हुए अधिकारी के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगा। रोजगार की मांग को लेकर मजदूर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर मजदूरों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नौ महीने से काम और भत्ते का इंतजार

पीड़ित मजदूरों का आरोप है कि उन्होंने करीब नौ महीने पहले रोजगार के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें कोई काम नहीं मिला है। नियमानुसार, यदि आवेदन के बाद तय समय सीमा के भीतर काम नहीं मिलता है, तो सरकार को बेरोजगारी भत्ता देना होता है। हालांकि, इन मजदूरों को न तो रोजगार मिला और न ही बेरोजगारी भत्ते का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है।

लखनौर प्रखंड क्षेत्र के लगभग 500 मजदूरों ने रोजगार पाने के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी की थी। इन मजदूरों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राजेश राम और कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

परिवार का भरण-पोषण बना चुनौती

वायरल वीडियो में दिख रहा युवक अपनी लाचारी बयां करते हुए अधिकारी से रोजगार की गुहार लगा रहा है। मजदूरों का कहना है कि उनके पास आजीविका का कोई अन्य साधन नहीं है। काम न मिलने के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और घर का राशन जुटाना भी मुश्किल हो गया है। बढ़ती महंगाई और बारिश के मौसम ने उनकी परेशानियों को और अधिक बढ़ा दिया है।

इस मामले को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अकबर ने भी बीडीओ के समक्ष मजदूरों की समस्या को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीब मजदूर अपने हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुनवाई करने के बजाय उदासीन बने हुए हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की राह

मजदूरों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से रोजगार उपलब्ध कराने या नियमानुसार बेरोजगारी भत्ते का भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रखंड प्रशासन ने सफाई दी है कि मजदूरों की शिकायतों की जांच कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन मजदूरों को उनका हक दिला पाता है या यह मामला केवल फाइलों में ही दबा रह जाएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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