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लखनऊ विश्वविद्यालय: 50 दिनों से छात्रों का धरना जारी, कैनोपी हटाने पर बढ़ा विवाद

सोमवार शाम धरनास्थल पर कैनोपी लगाने को लेकर छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों के बीच जमकर विवाद हुआ था। छात्रों का आरोप है कि बारिश से बचाव के लिए लगाई गई कैनोपी और प्लास्टिक शीट को हटाया गया, जिसके बाद उन्हें खुले आसमान के नीचे धरना देना पड़ा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

21 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
लखनऊ विश्वविद्यालय: 50 दिनों से छात्रों का धरना जारी, कैनोपी हटाने पर बढ़ा विवाद
मूल स्रोत

लखनऊ विश्वविद्यालय में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आंदोलन मंगलवार को 50वें दिन भी जारी रहा। बीते 2 जून से विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। इस लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सोमवार शाम को स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब धरनास्थल पर लगाई गई कैनोपी को लेकर छात्रों और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों के बीच तीखी बहस और विवाद हुआ।

कैनोपी हटाने को लेकर प्रशासन से टकराव

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके आंदोलन को दबाने के लिए अमानवीय हथकंडे अपना रहा है। सोमवार शाम को जब छात्रों ने बारिश से बचने के लिए धरनास्थल पर कैनोपी और प्लास्टिक शीट लगाई, तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों ने उसे हटवा दिया। छात्रों का दावा है कि प्रशासन ने न केवल कैनोपी हटाई, बल्कि बारिश से बचाव के लिए लगाई गई प्लास्टिक शीट को भी फाड़ दिया, जिसके कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस घटना के बाद छात्रों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस को तहरीर दी है, जिसमें कैनोपी और तिरपाल चोरी करने का आरोप लगाया गया है। छात्रों का कहना है कि भीषण गर्मी के बाद अब लगातार हो रही बारिश के बीच भी वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को सुलझाने के बजाय उनके संघर्ष को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।

छात्रों की प्रमुख मांगें और संकल्प

आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की इन कार्रवाइयों से उनका मनोबल टूटने वाला नहीं है। छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं, बल्कि छात्रहितों और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए है। उन्होंने दोहराया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। छात्रों के अनुसार, फीस वृद्धि और निष्कासन जैसे मुद्दों का समाधान दमनकारी नीतियों से नहीं, बल्कि सार्थक बातचीत से ही संभव है।

छात्रों की मुख्य मांगों में विश्वविद्यालय में हाल ही में की गई फीस वृद्धि को वापस लेना, निष्कासित छात्रों को पुनः बहाल करना और प्रशासन द्वारा छात्रों के साथ किए जा रहे कथित उत्पीड़न को बंद करना शामिल है। इसके साथ ही, छात्र प्रशासन से इन मुद्दों पर सीधे संवाद की मांग कर रहे हैं।

प्रशासनिक रुख और आंदोलन का भविष्य

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक समाधान सामने नहीं आया है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन बातचीत के बजाय बल प्रयोग और प्रशासनिक दबाव का सहारा ले रहा है। 50 दिनों से जारी इस गतिरोध ने विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक माहौल को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ वार्ता की मेज पर आता है या फिर यह आंदोलन और लंबा खिंचेगा। फिलहाल, छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं और बारिश व अन्य विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गेट नंबर-1 पर डटे हुए हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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