सवाई माधोपुर में लेपर्ड का आतंक: ढाई महीने में 4 हमले, 2 लोगों की गई जान
सवाई माधोपुर जिले में करीब ढाई महीने में लेपर्ड के 4 हमले सामने आए हैं, जिनमें 2 लोगों की मौत हुई है। फॉरेस्ट एरिया से आकर लेपर्ड घरों में घुस रहे हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

आबादी वाले इलाकों में लेपर्ड की दस्तक
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में पिछले ढाई महीनों से लेपर्ड (तेंदुए) का खौफ बढ़ता जा रहा है। टोडरा उपतहसील और रणथंभौर की फलौदी रेंज के आसपास के गांवों में लेपर्ड के हमलों की चार बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। इन हमलों में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वन्यजीवों का इंसानी बस्तियों में घुसकर लोगों को निशाना बनाना स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का दायरा सिमटने और प्राकृतिक शिकार (प्रे बेस) की कमी के कारण लेपर्ड भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। ये जानवर रात के अंधेरे में घरों में घुसकर सो रहे लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं, जो इनकी बदलती आक्रामक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
घर में घुसकर किए जानलेवा हमले
हमलों का सिलसिला 20 मई को शुरू हुआ, जब टोडरा क्षेत्र में एक सिक्योरिटी गार्ड पर लेपर्ड ने हमला किया। गार्ड ने बहादुरी दिखाते हुए लात मारकर अपनी जान बचाई, लेकिन उसे गंभीर चोटें आईं। इसके बाद 16 जून को एक और दिल दहला देने वाली घटना हुई, जिसमें लेपर्ड ने घर की छत पर सो रहे एक युवक को दबोच लिया। उस वक्त युवक की बहन ने साहस दिखाते हुए लेपर्ड से मुकाबला किया और अपने भाई को मौत के मुंह से खींच निकाला।
7 अगस्त को टोडरा में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला लीलादेवी पर लेपर्ड ने घर के बरामदे में हमला कर दिया। लेपर्ड उन्हें घसीटकर ले जाने की कोशिश में था। गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यह घटना क्षेत्र में दहशत का मुख्य कारण बनी।
3 साल के मासूम की मौत से गांव में मातम
सबसे दुखद घटना 20 अगस्त को दुमोदा गांव में हुई। रणथंभौर की फलौदी रेंज के पास आंगन में खेल रहे 3 साल के मासूम दिलखुश बैरवा को लेपर्ड ने उठा लिया। वह बच्चे को घसीटते हुए पहाड़ी की ओर ले गया। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों और पुलिस ने टॉर्च की रोशनी में घंटों तक तलाश की। जब बच्चा मिला, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लेपर्ड अब घरों के अंदर तक घुस रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। लोग अब रात के समय घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
वन विभाग की चुनौती और सुरक्षा के उपाय
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, लेपर्ड एक शर्मीला जीव है, लेकिन जब उसे भोजन नहीं मिलता या वह घायल होता है, तो वह इंसानों के करीब आ जाता है। सवाई माधोपुर के इन इलाकों में लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वन विभाग को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने की आवश्यकता है। ग्रामीणों को भी रात के समय सावधानी बरतने और घरों के आसपास रोशनी की व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल, प्रभावित गांवों में डर का माहौल है और लोग वन विभाग से लेपर्ड को पकड़ने या उन्हें वापस जंगल की ओर खदेड़ने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से इस मामले में संवेदनशीलता बरतने और प्रभावित परिवारों को उचित सहायता देने पर चर्चा की जा रही है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!