प्रयोगशाला सहायक भर्ती 2018: OMR शीट में हेराफेरी कर नौकरी पाने वाला अभ्यर्थी गिरफ्तार, 53 अंक बढ़ाकर हुआ था चयन
एसओजी की जांच में सामने आया कि OMR शीट स्कैनिंग के दौरान अंकों में हेराफेरी कर आरोपी का चयन कराया गया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

प्रयोगशाला सहायक भर्ती 2018 में बड़ा फर्जीवाड़ा
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े ओएमआर (OMR) शीट घोटाले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह मामला परीक्षा के दौरान अंकों में हेराफेरी कर अयोग्य अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने से जुड़ा है। एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत से कई अभ्यर्थियों के अंकों को बढ़ाकर उन्हें अंतिम चयन सूची में जगह दी गई थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान पिंटू कुमार मीणा (27) के रूप में हुई है, जो दौसा जिले का निवासी है। आरोपी वर्तमान में उदयपुर के झाड़ोल स्थित केंद्रीय एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में एलडीसी (LDC) के पद पर कार्यरत था। एसओजी की टीम लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है।
53 अंक बढ़ाकर हासिल की थी नौकरी
जांच में सामने आया है कि पिंटू कुमार मीणा के चयन के लिए ओएमआर शीट की स्कैनिंग के दौरान बड़े स्तर पर धांधली की गई थी। रिकॉर्ड में उसके अंक 158 दर्शाए गए थे, जिसके आधार पर उसका चयन सुनिश्चित किया गया। हालांकि, जब कर्मचारी चयन बोर्ड ने संदेह के आधार पर ओएमआर शीट की दोबारा स्कैनिंग करवाई, तो उसके वास्तविक अंक केवल 105 निकले। इस प्रकार, 53 अंकों की हेराफेरी कर उसे अवैध रूप से चयनित कराया गया था।
इस पूरे मामले में ओएमआर स्कैनिंग करने वाली एजेंसी 'राभव लिमिटेड' की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एजेंसी के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शादाब खान के साथ-साथ कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह को एसओजी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इन आरोपियों ने अभ्यर्थियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से डेटा में बदलाव किया था।
27 अभ्यर्थियों की भूमिका जांच के दायरे में
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, यह घोटाला केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं है। अब तक की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि एजेंसी के कर्मचारियों ने कुल 27 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की थी। इन सभी को अनुचित लाभ पहुंचाकर अंतिम चयन सूची में शामिल किया गया था। एसओजी अब इन सभी 27 अभ्यर्थियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साजिश थी, जिसमें कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट मिलीभगत के साक्ष्य मिले हैं। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है, और आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया
यह कार्रवाई महानिरीक्षक अजयपाल लांबा के निर्देशन और उपमहानिरीक्षक भुवन भूषण यादव के सुपरविजन में की गई है। पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के नेतृत्व में अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह की टीम इस मामले की कड़ियाँ जोड़ रही है। एसओजी इस बात पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी इसी तरह की धांधली की है।
फिलहाल, आरोपी पिंटू कुमार मीणा को हिरासत में लेकर एसओजी पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और अन्य लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके। भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए एसओजी की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!