कोटा में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क: बेंगलुरु से ट्रेनिंग लेकर मास्टरमाइंड ने खड़ा किया फर्जी कॉल सेंटर्स का साम्राज्य
कोटा में गिरफ्तार हुए ठगी का मास्टर माइंड जोधपुर निवासी आरोपी मोहम्मद अशफाक ने बेंगलुरु के कॉल सेंटर से साइबर ठगी का तरीका सीखा। साइबर फ्रॉड के मामले में पकड़े गए आरोपी ने कोटा में कॉल सेंटर को इस तरह तैयार किया था कि बाहर से यह सामान्य जॉब सेंटर जैसा नजर आए, लेकिन अंदर बैठी लड़कियां रोजाना सैकड़ों लोगों को फोन कर उन्हें निवेश के नाम पर जाल में फंसाती थीं।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बेंगलुरु से सीखी ठगी की कला
कोटा पुलिस ने हाल ही में एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड जोधपुर निवासी मोहम्मद अशफाक है, जिसने बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम करते हुए ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगने का तरीका सीखा था। बेंगलुरु के बाद उसने भोपाल, इंदौर और मुंबई में भी इसी तरह के नेटवर्क के साथ काम किया। अनुभव हासिल करने के बाद उसने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर कोटा में अपना खुद का अवैध सेटअप तैयार किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कोटा के गुमानपुरा और छावनी इलाकों में तीन कॉल सेंटर संचालित किए थे। बाहर से ये ऑफिस एक सामान्य प्लेसमेंट एजेंसी या डेटा एंट्री सेंटर की तरह दिखते थे, लेकिन अंदर का सच कुछ और ही था। यहां काम करने वाली युवतियों को निवेश के नाम पर लोगों को लुभाने और उन्हें जाल में फंसाने का काम सौंपा गया था।
जाल बिछाने का शातिर तरीका
आरोपी ने ठगी के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाई थी। उसने प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए युवतियों को नौकरी पर रखा और उन्हें सात दिन की कड़ी ट्रेनिंग दी। कॉल सेंटर में एक बोर्ड लगाया गया था, जिस पर ग्राहकों के संभावित सवालों और उनके जवाबों की स्क्रिप्ट लिखी होती थी। युवतियों को यह सिखाया जाता था कि कैसे मीठी आवाज में बात करके लोगों का भरोसा जीतना है और उन्हें ट्रेडिंग के नाम पर निवेश के लिए राजी करना है।
ठगी के लिए आरोपी ने विदेशी डोमेन वाली फर्जी वेबसाइटें तैयार की थीं, जिन पर लोगों को लाखों का मुनाफा दिखाया जाता था। भरोसा जीतने के लिए फर्जी विदेशी सर्टिफिकेट का भी इस्तेमाल किया जाता था। जब कोई व्यक्ति निवेश के लिए तैयार हो जाता, तो उसे फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजकर पैसे जमा करवाए जाते थे।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई और बरामदगी
डीएसपी गंगासहाय शर्मा ने बताया कि मुख्य आरोपी मोहम्मद अशफाक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 102 मोबाइल फोन, 11 लैपटॉप, डेस्कटॉप, हार्ड डिस्क और कई रजिस्टर बरामद किए हैं। आरोपी ने युवतियों के नाम पर सिम कार्ड खरीदे थे और उन्हीं के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था। इन खातों के लिए वह खाताधारकों को 10 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देता था।
आरोपी की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि वह हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक का खर्च करता था। वह खुद 50 से ज्यादा युवतियों को मामूली वेतन पर काम पर रखता था और उन्हें ठगी की रकम पर अलग से कमीशन भी देता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के तकनीकी पहलुओं, सर्वर और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
आगे की जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से दो अलग-अलग आधार कार्ड मिले हैं, जो इंदौर और जोधपुर के पते पर बने हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कॉल सेंटर के अंदर ही कुछ युवतियों को 'ट्रेनर' बना रखा था, जो नई भर्ती होने वाली युवतियों को ठगी के काम के लिए तैयार करती थीं। फिलहाल, पुलिस बरामद किए गए मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस गिरोह के अन्य संपर्कों को खंगाल रही है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!