कोटा निकाय चुनाव: टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार, सोशल मीडिया पर शक्ति प्रदर्शन तेज
बीजेपी में अब तक 150 आवेदन, कांग्रेस में पांच सौ ज्यादा आवेदन गए। पैनल तक तय नही,सोशल मीडिया पर दावेदारों का प्रचार।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

टिकट वितरण से पहले सोशल मीडिया पर दावेदारी
कोटा में आगामी निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने टिकटों का पैनल तय नहीं किया है, लेकिन दावेदारों ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू कर दिया है। संभावित उम्मीदवार अपने समर्थकों के जरिए बधाई संदेश और प्रचार सामग्री साझा कर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता अपने-अपने वार्डों में सक्रिय हो गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्टर और बैनर के जरिए प्रचार का दौर जारी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि टिकट पाने के लिए दावेदारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने वाली है। दोनों ही पार्टियों के कार्यालयों में आवेदन फॉर्म लेने और जमा करने वालों की भीड़ देखी जा रही है।
भाजपा और कांग्रेस में आवेदनों की होड़
भाजपा में आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही दिन से कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। पार्टी के शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन के अनुसार, अब तक लगभग 150 दावेदारों ने अपने आवेदन जमा किए हैं। भाजपा ने व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन पत्र जारी किए थे, जिसके बाद से ही जिला कार्यालय पर दावेदारों का तांता लगा हुआ है।
दूसरी ओर, कांग्रेस में भी टिकट पाने की होड़ कम नहीं है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अब तक 500 से अधिक कार्यकर्ता आवेदन पत्र ले जा चुके हैं, जिनमें से 380 आवेदन विधिवत रूप से जमा भी किए जा चुके हैं। कांग्रेस की शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने दावा किया है कि पार्टी इस बार पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और बोर्ड बनाने का लक्ष्य रखेगी।
जीत की रणनीति और दावे
भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने दावा किया है कि कोटा के 100 में से 80 से अधिक वार्डों में कमल खिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी केवल उन्हीं कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगी जो बूथ, शक्ति केंद्र और मंडल स्तर पर जनता के बीच सक्रिय रहे हैं और समाज सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने विपक्षी दल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार ढूंढने में भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वहीं, कांग्रेस का अपना अलग रुख है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम का कहना है कि पार्टी केवल 'जीताऊ' उम्मीदवारों को ही टिकट देगी। उनका जोर ऐसे चेहरों पर है जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं और जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता बनाए हुए हैं। दोनों ही दल फिलहाल आवेदनों की जांच और जमीनी फीडबैक के आधार पर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
आगे की राह
निकाय चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सही उम्मीदवारों का चयन करना है। जहां एक ओर बड़ी संख्या में आवेदन आने से कार्यकर्ताओं का उत्साह झलक रहा है, वहीं टिकट न मिलने पर भीतरघात की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान किन चेहरों पर दांव लगाता है और सोशल मीडिया पर सक्रिय दावेदारों में से किसे चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिलता है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!