सुपौल में कोसी नदी का रौद्र रूप: कटाव की भेंट चढ़ा राधा-कृष्ण मंदिर, 24 से अधिक घर जलमग्न
सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत के वार्ड-3 स्थित सुजानपुर में कोसी नदी का कटाव लगातार कहर बरपा रहा है। रविवार को कटाव की चपेट में आने से राधा-कृष्ण मंदिर भी नदी में समा गया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

सुपौल में कोसी का कहर: मंदिर और आशियाने नदी में समाए
बिहार के सुपौल जिले में कोसी नदी का कटाव विकराल रूप धारण कर चुका है। किशनपुर प्रखंड की मौजहा पंचायत के सुजानपुर गांव में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। रविवार को नदी के कटाव ने एक धार्मिक स्थल को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। सुजानपुर के वार्ड-3 में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर देखते ही देखते कोसी की जलधारा में विलीन हो गया।
पिछले एक महीने से जारी कटाव के कारण अब तक दो दर्जन से अधिक परिवार बेघर हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि कोसी नदी का जलस्तर वर्तमान में सामान्य है, लेकिन पानी घटने के साथ ही कटाव की गति और अधिक तेज हो गई है। नदी का किनारा लगातार धंस रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए अपने घरों को बचा पाना नामुमकिन हो गया है।
जान बचाने की जद्दोजहद में ग्रामीण
ग्रामीण अब अपने घरों को सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। कई लोग अपने ईंट और एस्बेस्टस के बने घरों को खुद ही हथौड़ों से तोड़ रहे हैं ताकि कम से कम घर का सामान और कीमती वस्तुएं सुरक्षित निकाली जा सकें। स्थानीय निवासी राजेंद्र झा ने बताया कि रात के समय कटाव का खतरा और भी बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कई परिवारों ने रातों-रात अपना सब कुछ खो दिया है और सुबह होने तक वहां केवल नदी का पानी ही नजर आता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके लिए जान बचाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। हालांकि, कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास अब सिर छिपाने के लिए कोई जगह नहीं बची है।
प्रशासनिक लापरवाही और कटाव का कारण
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। श्याम झा जैसे स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य किए गए होते, तो आज राधा-कृष्ण मंदिर और दर्जनों घर नदी में समाने से बच सकते थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से कटावरोधी कार्य शुरू किए जाएं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की उचित व्यवस्था की जाए।
कोसी बराज के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह 11 बजे तक बराज से कुल 1,41,345 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। इसमें मुख्य बराज से 1,37,345 क्यूसेक और वेस्टर्न कोसी मेन कैनाल से 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर के बढ़ने की संभावना के साथ ही कटाव का खतरा और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अधिकारियों के निर्देश और भविष्य की चिंता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुपौल के जिलाधिकारी सावन ने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को कटाव रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। प्रशासन का दावा है कि कटावरोधी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। हालांकि, सुजानपुर के निवासियों के लिए यह आश्वासन फिलहाल नाकाफी साबित हो रहा है, क्योंकि हर गुजरते घंटे के साथ नदी का दायरा बढ़ता जा रहा है।
आने वाले दिनों में यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है, तो कटाव का दायरा और भी बढ़ सकता है। फिलहाल, प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से त्वरित राहत और पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि वे इस आपदा से उबर सकें।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!