किशनगंज: 14 गांवों के लोग शव कंधे पर लेकर नदी पार करने को मजबूर, प्रशासन ने लिया संज्ञान
किशनगंज के 14 गांवों के लोगों की गरिमामय अंतिम विदाई की मांग आखिरकार प्रशासन तक पहुंच गई है। डीएम नवीन कुमार को मांग पत्र सौंपे जाने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

बिहार के किशनगंज जिले में एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जहां 14 गांवों के निवासियों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है। इन गांवों में पुल न होने के कारण ग्रामीणों को शवों को कंधे पर उठाकर छाती तक गहरे पानी में नदी पार करनी पड़ती है। यह स्थिति न केवल कष्टकारी है, बल्कि मानवीय गरिमा के भी विपरीत है।
प्रशासन की सक्रियता और जमीनी हकीकत
इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब कदम उठाए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें ग्रामीणों को नदी पार करते हुए देखा गया। इसके बाद जिला पार्षद प्रतिनिधि इमरान आलम ने जिलाधिकारी नवीन कुमार को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा। जिलाधिकारी के निर्देश पर बहादुरगंज प्रखंड के बैसा घाट का निरीक्षण करने के लिए एसडीएम अनिकेत कुमार के नेतृत्व में एक टीम मौके पर पहुंची।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम के साथ ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार और कनीय अभियंता बिपिन कुमार भी मौजूद थे। टीम ने मौके का मुआयना किया और ग्रामीणों से बातचीत कर वस्तुस्थिति को समझा। स्थानीय लोगों ने बताया कि बैसा कब्रिस्तान ही उनका पारंपरिक अंतिम संस्कार स्थल है, जहां उनके पूर्वज दफन हैं, लेकिन नदी के बीच पुल न होना उनके लिए हर बार एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
20 से 30 हजार की आबादी प्रभावित
इस समस्या से बीरपुर, चकचकी, नोदियाटोली, झींगाकाटा इस्तमरार, झींगाकाटा तौफीर, झींगाकाटा लाट टोला, दक्षिण टोला, हाटटोला, दोगच्छी, दर्जीटोला, बैसा, धापरटोली, तेघड़िया खास, युनुस टोला और लौचा सहित कुल 14 गांवों की 20 से 30 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित है। यह घाट बहादुरगंज प्रखंड मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर और एलआरपी चौक से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक पुल की मांग नहीं है, बल्कि यह सम्मानजनक अंतिम विदाई पाने के अधिकार का सवाल है। वर्षों से चली आ रही इस समस्या ने ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना दिया है, विशेषकर बरसात के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है।
अधिकारियों को प्रस्ताव भेजने के निर्देश
एसडीएम अनिकेत कुमार ने मौके पर मौजूद कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि वे प्राथमिकता के आधार पर पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार करें और उसे उच्च अधिकारियों के पास भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में जिला प्रशासन गंभीर है और जल्द ही कोई ठोस समाधान निकाला जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपने की बात भी कही है।
निरीक्षण के दौरान लौचा से महेशबथना जाने वाली सड़क का भी जायजा लिया गया, जो कटाव के कारण जर्जर हो चुकी है। एसडीएम ने इस सड़क को भी तत्काल चलने योग्य बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि आवागमन में किसी प्रकार की बाधा न आए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन के इस दौरे के बाद जल्द ही पुल का निर्माण कार्य शुरू होगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में उन्हें इस तरह की अमानवीय परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!