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पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज: अरविंद केजरीवाल ने सरकार के दमनकारी रवैये पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर देश के युवाओं के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है। सरकार उनकी बात सुनने की बजाय उन पर लाठीचार्ज करवा रही है, इंटरनेट बंद कर रही है और उन्हें संसद जाने से रोका जा रहा है, जो कि बिल्कुल गलत है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज: अरविंद केजरीवाल ने सरकार के दमनकारी रवैये पर उठाए सवाल
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युवाओं के संघर्ष पर केजरीवाल का तीखा प्रहार

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश के युवाओं के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि देश भर से आए लाखों युवा जो अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में एकत्र हुए हैं, उनके साथ सरकार का व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग कर रही है।

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि जंतर-मंतर पर जमा हुए छात्र न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं को बंद करने और छात्रों को संसद की ओर जाने से रोकने की कड़ी निंदा की। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाने का एक प्रयास है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

पेपर लीक और भविष्य की अनिश्चितता

पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए केजरीवाल ने कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। उन्होंने सवाल किया कि जब परीक्षाएं बार-बार लीक होती हैं और फिर री-इवैल्युएशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो छात्र आखिर जाएं तो कहां जाएं? उन्होंने कहा कि युवाओं का कीमती समय और मेहनत इन व्यवस्थागत खामियों की भेंट चढ़ रही है, जिससे उनमें भारी आक्रोश और हताशा है।

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे अपना अहंकार त्यागकर युवाओं से सीधे संवाद करें। उन्होंने कहा कि ये युवा हमारे ही देश का भविष्य हैं और सड़कों पर उतरना उनकी मजबूरी है। सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए उनके साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी जताया समर्थन

इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी छात्रों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि छात्र सुबह से देर रात तक कठिन परिश्रम करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली लोग पेपर लीक करवाकर उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। मान ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का संघर्ष न्याय के लिए है और उन्हें इस लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को यह समझना होगा कि युवाओं की अनदेखी करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

आगे की राह और सरकार की जिम्मेदारी

वर्तमान में दिल्ली में चल रहा यह प्रदर्शन युवाओं के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। पेपर लीक जैसी घटनाओं ने देश भर के छात्रों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार छात्रों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर गतिरोध इसी तरह बना रहेगा। युवाओं की मांग है कि परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही इस मामले में कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक हो सकता है। फिलहाल, दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और छात्रों का प्रदर्शन जारी है, जो सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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