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ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के टाउनहॉल में उमड़ी डिजिटल भीड़, आप ने किया 7 लाख दर्शकों का दावा

देश में ई-20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है और इसी बीच शनिवार को एक ऐसा डिजिटल मुकाबला देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी। एक तरफ दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित अरविंद केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20 था, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव कार्यक्रम था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के टाउनहॉल में उमड़ी डिजिटल भीड़, आप ने किया 7 लाख दर्शकों का दावा
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ई-20 पेट्रोल को लेकर डिजिटल मंच पर आमने-सामने

देश में ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर छिड़ी बहस के बीच शनिवार को एक दिलचस्प डिजिटल मुकाबला देखने को मिला। दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में अरविंद केजरीवाल ने 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20' का आयोजन किया। इसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी एक लाइव कार्यक्रम चल रहा था। सोशल मीडिया पर दोनों कार्यक्रमों के दौरान जुड़े दर्शकों की संख्या ने एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।

आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि केजरीवाल के टाउनहॉल को उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर एक साथ करीब 7 लाख (7,00,262) लोगों ने लाइव देखा। वहीं, पार्टी का दावा है कि उसी समय प्रधानमंत्री के आधिकारिक चैनल पर लाइव दर्शकों की संख्या महज 3,324 के आसपास थी। इस आंकड़े को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है।

जनता के मुद्दों पर केंद्रित रहा टाउनहॉल

पार्टी का कहना है कि यह बड़ी संख्या केवल एक डिजिटल आंकड़ा नहीं है, बल्कि ई-20 पेट्रोल को लेकर देश भर के वाहन मालिकों में पनप रही नाराजगी का संकेत है। टाउनहॉल में मैकेनिकों, प्रोफेसरों, डिलीवरी राइडर्स और आम वाहन मालिकों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। मुख्य रूप से माइलेज में कमी, इंजन में खराबी और सर्विसिंग के बढ़ते खर्च जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

केजरीवाल ने इस दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि हर पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों का विकल्प उपलब्ध होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ई-20 को सस्ता करने और पेट्रोल की कीमत को 84 रुपये प्रति लीटर से कम करने की वकालत की।

केजरीवाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि पर्याप्त वैज्ञानिक रिपोर्ट साझा किए बिना ई-20 को देश पर थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज करना गलत है और सरकार को इस नीति के प्रभावों पर स्पष्टता देनी चाहिए।

बढ़ता जन-असंतोष और सरकार के लिए चुनौती

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सवाल उठाया है कि यदि ई-20 पेट्रोल इतना ही फायदेमंद है, तो सरकार लोगों को विकल्प देने से क्यों कतरा रही है। कई लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। आम आदमी पार्टी इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल रैली बता रही है और इसे जनता के बदलते मूड के रूप में देख रही है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि जब लाखों लोग स्वेच्छा से किसी नीति पर चर्चा सुनने के लिए जुड़ते हैं, तो यह सरकार के लिए एक चेतावनी है। उनका कहना है कि जनभावनाओं को लंबे समय तक अनदेखा करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि दोनों कार्यक्रमों की प्रकृति और दर्शक व्यवहार अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए आंकड़ों की सीधी तुलना करना पूरी तरह सही नहीं है। बावजूद इसके, 7 लाख बनाम 3 हजार का यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर ई-20 बहस का सबसे चर्चित विषय बन गया है और विपक्ष इसे भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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