कौशांबी: नकली यूरिया बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, भारी मात्रा में तरल यूरिया और इफको की बोरियां बरामद
कौशांबी के चरवा थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम एक नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापेमारी कर भारी मात्रा में तरल यूरिया, इफको यूरिया की बोरियां, नकली स्टीकर और अन्य सामग्री बरामद की गई। चरवा थाना क्षेत्र के पंसौर गांव में मंगलवार शाम EIPR के इन्वेस्टिगेटर ऑफिसर पीयूष श्रीवास्तव और देवेंद्र प्रताप सिंह की टीम ने कथित नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापेमारी की।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

पंसौर गांव में चल रहा था अवैध कारोबार
कौशांबी जिले के चरवा थाना क्षेत्र में एक बड़ी अवैध गतिविधि का खुलासा हुआ है। पंसौर गांव में संचालित एक कथित नकली यूरिया फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है। इस कार्रवाई में ईआईपीआर (EIPR) की टीम ने मौके से तरल यूरिया की बाल्टियां और इफको ब्रांड की खाद की बोरियां जब्त की हैं।
छापेमारी के दौरान टीम को लगभग 100 बाल्टी तरल यूरिया और एक पिकअप वाहन में लदी हुई 70 बोरी इफको यूरिया मिली। इसके अलावा, मौके से टाटा गल्फ और एचपी ब्रांड की खाली बाल्टियां, नकली स्टीकर और खाद की खाली बोरियां भी बरामद की गई हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह अवैध इकाई पिछले दो वर्षों से सक्रिय थी।
संचालक फरार, पुलिस और कृषि विभाग की जांच जारी
इस फैक्ट्री का संचालन सल्लाहपुर निवासी अजय कुमार द्वारा किया जा रहा था। छापेमारी की भनक लगते ही संचालक और वहां काम करने वाले अन्य कर्मचारी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही सीओ चायल शिवांक सिंह, स्थानीय पुलिस, जिला कृषि अधिकारी शिव शंकर चौधरी और जीएसटी विभाग की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए।
जिला कृषि अधिकारी शिव शंकर चौधरी ने बताया कि सब्सिडी वाली यूरिया को अवैध रूप से तरल रूप में बदलकर बीएस-6 वाहनों के लिए बेचा जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का तरल पदार्थ न केवल वाहनों के इंजन के लिए खतरनाक है, बल्कि यह किसानों के साथ भी बड़ा धोखा है। बरामद सामग्री को सील कर दिया गया है।
सब्सिडी वाली खाद की आपूर्ति पर उठे सवाल
प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाली इफको यूरिया इस फैक्ट्री तक कैसे पहुंची। कृषि विभाग अब इस बात की गहन जांच कर रहा है कि यह खाद किस सहकारी समिति से ली गई थी। यूरिया वितरण के लिए आधार कार्ड और किसान आईडी जैसे दस्तावेजों की अनिवार्यता के बावजूद इतनी बड़ी खेप का अवैध फैक्ट्री तक पहुंचना गंभीर जांच का विषय है।
इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद आरोपी संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और उनके नेटवर्क को खंगालने का प्रयास कर रही है।
किसानों और वाहनों के लिए खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नकली खाद का निर्माण न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह बाजार में मौजूद असली उत्पादों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है। वाहनों में इस नकली तरल यूरिया का उपयोग करने से इंजन के खराब होने का खतरा बना रहता है, जिससे वाहन मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र के अन्य गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर भी सतर्कता बढ़ा दी है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही खाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!