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कटिहार: राजस्व कर्मचारी के तबादले के बाद भी सक्रिय रहा डोंगल, 39 दाखिल-खारिज मामले हुए जनरेट

कटिहार अमदाबाद अंचल कार्यालय में राजस्व प्रशासन की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां विधिवत विरमित किए जा चुके राजस्व कर्मचारी के डोंगललॉगिन से रिलीव होने के दो दिन बाद भी 39 दाखिल-खारिज के मामले जनरेट कर दिए गए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
कटिहार: राजस्व कर्मचारी के तबादले के बाद भी सक्रिय रहा डोंगल, 39 दाखिल-खारिज मामले हुए जनरेट
मूल स्रोत

अमदाबाद अंचल कार्यालय में बड़ी प्रशासनिक चूक

बिहार के कटिहार जिले के अमदाबाद अंचल कार्यालय में राजस्व प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक राजस्व कर्मचारी के तबादले और कार्यमुक्त होने के बाद भी उनके डिजिटल डोंगल का उपयोग जारी रहा। इस गंभीर चूक के कारण कर्मचारी के रिलीव होने के दो दिन बाद भी उनके लॉगिन से 39 दाखिल-खारिज के मामले जनरेट कर दिए गए, जिससे राजस्व विभाग की ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्व कर्मचारी मनोहर कुमार का स्थानांतरण भागलपुर जिले में कर दिया गया था। विभागीय आदेश के तहत उन्हें 28 जुलाई 2026 को अमदाबाद अंचल से विधिवत रूप से विरमित (रिलीव) कर दिया गया था। इसके अगले दिन, 29 जुलाई को उनके प्रभार वाले सभी राजस्व हल्कों का कार्यभार आधिकारिक रूप से दूसरे कर्मचारी अवनीश कुमार को सौंप दिया गया था।

सिस्टम की खामियों से फर्जीवाड़े का डर

नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के तबादले या कार्यमुक्त होने के तुरंत बाद उनके डिजिटल लॉगिन और डोंगल को निष्क्रिय कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में नए कर्मचारी अवनीश कुमार का डोंगल सक्रिय नहीं किया गया, जबकि पूर्व कर्मचारी मनोहर कुमार का लॉगिन सिस्टम में बना रहा। इसी तकनीकी ढिलाई का फायदा उठाते हुए 30 जुलाई को 39 दाखिल-खारिज आवेदन संसाधित कर दिए गए।

इन 39 मामलों में विभिन्न मौजाओं की जमीनें शामिल हैं। इनमें चौकिया पहाड़पुर के 9, बैदा के 7, भरनाठी के 3, भवानीपुर के 3, देवा लक्ष्मीपुर के 5, रोशना माला का 1, दिल्ली दीवानगंज का 1 और बेलगच्छी के 4 मामले शामिल हैं। शेष मामले अन्य मौजाओं से संबंधित हैं। इन आवेदनों का इस तरह से जनरेट होना जमीन संबंधी फर्जीवाड़े की आशंका को बल देता है।

प्रशासनिक चुप्पी और जांच की मांग

इस घटना के उजागर होने के बाद अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर अंचलाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अंचल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि विभाग इस पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच करवा रहा है ताकि यह पता चल सके कि डोंगल का उपयोग किसने और किस उद्देश्य से किया।

स्थानीय लोगों और राजस्व कर्मियों ने जिला पदाधिकारी से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का तर्क है कि यदि समय रहते डिजिटल सिस्टम को अपडेट नहीं किया गया, तो इससे बड़े पैमाने पर भूमि विवाद और अवैध दाखिल-खारिज जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। राजस्व विभाग के जानकारों का कहना है कि डोंगल का दुरुपयोग सीधे तौर पर कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही को दर्शाता है।

फिलहाल, इस घटना ने राजस्व विभाग की ऑनलाइन कार्यप्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की तकनीकी चूक न हो और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस मामले में जिला प्रशासन के अगले कदम का सभी को इंतजार है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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