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करनाल में साइबर ठगी: पीएनबी ऐप का पासवर्ड बदलते ही खाते से उड़े 3.58 लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, बीती 4 जुलाई को शाम करीब 4:30 बजे वह पीएनबी वन मोबाइल एप्लीकेशन का पासवर्ड ठीक करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हुआ और एप बंद कर दिया। पीड़ित ने अगले दिन राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

26 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
करनाल में साइबर ठगी: पीएनबी ऐप का पासवर्ड बदलते ही खाते से उड़े 3.58 लाख रुपये
मूल स्रोत

पासवर्ड रीसेट करने की कोशिश बनी मुसीबत

हरियाणा के करनाल जिले में एक व्यक्ति के साथ डिजिटल बैंकिंग के दौरान बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने अपने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के मोबाइल एप्लीकेशन का पासवर्ड अपडेट करने का प्रयास किया था, जिसके बाद अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खातों को निशाना बनाया। देखते ही देखते कुछ ही मिनटों के भीतर पीड़ित के खाते से 3 लाख 58 हजार रुपये की बड़ी रकम गायब हो गई।

पीड़ित सुखबीर सिंह, जो गांव भैनी खुर्द के निवासी हैं, ने बताया कि घटना 4 जुलाई की शाम की है। शाम करीब 4:30 बजे वे अपने मोबाइल पर पीएनबी वन ऐप का पासवर्ड ठीक करने की कोशिश कर रहे थे। तकनीकी कारणों से पासवर्ड रीसेट नहीं हो पाया, जिसके बाद उन्होंने ऐप बंद कर दिया। हालांकि, इसके कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने के संदेश आने शुरू हो गए।

मिनटों में खाली हुए खाते

शिकायत के अनुसार, शाम 4:57 बजे से शुरू हुआ यह सिलसिला करीब एक घंटे तक चलता रहा। अपराधियों ने एक के बाद एक कई ट्रांजैक्शन किए। पहले 6 हजार रुपये और फिर 20 हजार रुपये की निकासी हुई। इसके बाद अलग-अलग समय पर 30 हजार, 50 हजार और 90 हजार रुपये तक की बड़ी रकम खाते से ट्रांसफर कर दी गई। पीड़ित का कहना है कि ठगों ने उनके दूसरे खाते की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) को भी तोड़कर पैसे निकाल लिए।

कुल मिलाकर 3 लाख 58 हजार रुपये की ठगी की गई। पीड़ित ने अगले दिन यानी 5 जुलाई को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके घटना की जानकारी दी और अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और उनकी डूबी हुई रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

पुलिस की जांच और साइबर सुरक्षा

करनाल के साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 जुलाई को औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर सुरेंद्र को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रांजैक्शन की डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग ऐप का उपयोग करते समय किसी भी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत ऐप पर पासवर्ड अपडेट नहीं करना चाहिए। साथ ही, सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग बैंकिंग कार्यों के लिए करने से बचना चाहिए।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के साथ भी ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें ताकि समय रहते ट्रांजैक्शन को रोका जा सके। फिलहाल, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पासवर्ड रीसेट करने के दौरान क्या कोई मैलवेयर या फिशिंग लिंक सक्रिय था, जिससे अपराधियों को खाते का एक्सेस मिल गया।

फिलहाल, पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद है और पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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