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झालावाड़ की गागरोनी तोता साड़ी: 50 महिलाओं के हुनर को मिली नई उड़ान, कलेक्टर ने की सराहना

झालावाड़ जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को नई पहचान दिलाने वाली असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी का शनिवार को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने निरीक्षण किया। उन्होंने गागरोनी तोता साड़ी सहित विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए संस्था की सराहना की, जो करीब 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के साथ पारंपरिक कला के संरक्षण और पर्यावरण संरक्ष

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
झालावाड़ की गागरोनी तोता साड़ी: 50 महिलाओं के हुनर को मिली नई उड़ान, कलेक्टर ने की सराहना
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हथकरघा कला को मिल रहा है नया आयाम

झालावाड़ जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है। हाल ही में जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने इस केंद्र का दौरा किया और वहां चल रही गतिविधियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों को भी सराहा।

इस फाउंडेशन के माध्यम से वर्तमान में करीब 50 ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि झालावाड़ की सदियों पुरानी कला को भी जीवित रखे हुए हैं। कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान बुनकरों से बातचीत की और उत्पादन की बारीकियों को समझा।

गागरोनी तोता साड़ी की बढ़ती लोकप्रियता

इस केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि 'गागरोनी तोता साड़ी' है, जो अब झालावाड़ की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। इस साड़ी में स्थानीय संस्कृति और गागरोन क्षेत्र की पारंपरिक कला का अनूठा संगम देखने को मिलता है। कलेक्टर ने कहा कि यह उत्पाद न केवल राज्य स्तर पर बल्कि जिला स्तर पर भी कई सम्मान प्राप्त कर चुका है, जो इस कला की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

निरीक्षण के दौरान बेडशीट, खेस, टॉवल और अन्य हथकरघा उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों की फिनिशिंग और डिजाइन को देखकर कलेक्टर ने संस्था के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत से तैयार ये उत्पाद बाजार में अपनी अलग जगह बना रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण और नवाचार

संस्था केवल कपड़ों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काम कर रही है। यहां की महिलाएं रद्दी अखबारों का उपयोग करके हैंडबैग, मोबाइल बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं। कलेक्टर ने इस नवाचार को 'रीसाइक्लिंग' का बेहतरीन उदाहरण बताया और कहा कि यह पहल रोजगार सृजन के साथ-साथ कचरा प्रबंधन में भी मददगार है।

हथकरघा कला में उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्था के सदस्यों को समय-समय पर सम्मानित भी किया गया है। वर्ष 2025 में सुजानमल को राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार में द्वितीय स्थान मिला था, वहीं इस वर्ष गीता बाई को प्रथम जिला स्तरीय बुनकर पुरस्कार से नवाजा गया है। ये सम्मान जिले के अन्य कारीगरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

भविष्य की राह और निर्देश

दौरे के समापन पर जिला कलेक्टर ने संस्था के विपणन और प्रशिक्षण तंत्र को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि इन उत्पादों की मार्केटिंग और डिजाइनिंग पर और अधिक ध्यान दिया जाए, तो ये उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र आने वाले समय में झालावाड़ की कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

प्रशासन का यह दौरा स्थानीय कारीगरों के लिए उत्साहजनक रहा है। महिलाओं का मानना है कि सरकारी सहयोग और मार्गदर्शन से उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला को सीखने के लिए प्रेरित होगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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