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जहानाबाद: मनरेगा जेई अमन कुमार 20 हजार रुपये घूस लेते निगरानी टीम के हत्थे चढ़ा

जहानाबाद में मनरेगा योजनाओं से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में निगरानी विभाग, पटना की टीम ने कार्रवाई की है। टीम ने रतनी प्रखंड में पदस्थ मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

8 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
जहानाबाद: मनरेगा जेई अमन कुमार 20 हजार रुपये घूस लेते निगरानी टीम के हत्थे चढ़ा
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रतनी प्रखंड में निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई

बिहार के जहानाबाद जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के रतनी प्रखंड में तैनात मनरेगा के कनीय अभियंता (JE) अमन कुमार को निगरानी विभाग की पटना टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी पर मनरेगा की विभिन्न योजनाओं के भुगतान और कार्य संपादन के एवज में अवैध वसूली का गंभीर आरोप है।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग की टीम ने आरोपी को उस समय दबोचा जब वह रिश्वत की रकम स्वीकार कर रहा था। फिलहाल, निगरानी की टीम आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

क्या है पूरा मामला और शिकायत की पृष्ठभूमि

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला जामुक पंचायत से जुड़ा हुआ है। पंचायत रोजगार ग्राम सेवक अशोक कुमार ने इस संबंध में निगरानी थाना, पटना में 20 अगस्त 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि कनीय अभियंता अमन कुमार द्वारा मनरेगा की तीन अलग-अलग योजनाओं के निष्पादन के बदले उनसे 35 हजार रुपये की अवैध मांग की जा रही थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद जेई द्वारा काम को लटकाया जा रहा था और रिश्वत की राशि देने का दबाव बनाया जा रहा था। इस मांग से तंग आकर उन्होंने निगरानी विभाग का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया।

जाल बिछाकर की गई गिरफ्तारी

निगरानी विभाग ने शिकायत के सत्यापन के बाद एक जाल बिछाया। बातचीत के दौरान रिश्वत की राशि 35 हजार रुपये से घटाकर 20 हजार रुपये तय की गई। जैसे ही आरोपी जेई अमन कुमार ने रिश्वत की यह रकम ली, निगरानी विभाग की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। यह पूरी कार्रवाई डीएसपी आसिफ मेहपाल मेहदी के नेतृत्व में अंजाम दी गई।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को निगरानी थाना ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में और कौन-कौन शामिल है। साथ ही, आरोपी की संपत्ति और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तारी के बाद अब उसे विशेष निगरानी अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। विभाग का कहना है कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

इस घटना ने एक बार फिर मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निचले स्तर पर तैनात अधिकारियों की मनमानी के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे की जांच में और क्या खुलासे होते हैं और विभाग इस पर क्या सख्त कदम उठाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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