जंतर-मंतर प्रदर्शन: पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा कर्मियों के अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) बनाई है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। यह निर्णय 18 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य 20 जुलाई को हुई हिंसक झड़प के दौरान सुरक्षा कर्मियों की भूमिका की गहन समीक्षा करना है।
कमेटी में अन्य सदस्यों के रूप में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. एलआर बिश्नोई को शामिल किया गया है। यह समिति उन सभी आरोपों की जांच करेगी जिनमें प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग की बात कही गई है।
क्या था 20 जुलाई का पूरा मामला
विवाद की शुरुआत 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन से हुई थी। यह आंदोलन 49 दिनों तक चला। 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी संसद मार्च के लिए निकले, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई। दिल्ली पुलिस का तर्क है कि यह मार्च गैरकानूनी था और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना आवश्यक हो गया था।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के अनुचित इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना में 180 से अधिक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की सूचना मिली थी, जिनमें 120 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। प्रदर्शन का यह दौर 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था।
जांच का दायरा और आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह कमेटी अब उन सभी साक्ष्यों और वीडियो फुटेज की जांच करेगी जो उस दिन की घटना से संबंधित हैं। समिति का मुख्य कार्य यह निर्धारित करना है कि क्या पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में थी या फिर सुरक्षा बलों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज किया जाएगा और घटना के समय मौजूद रहे अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि प्रदर्शनकारी युवा पीढ़ी का हिस्सा हैं और उनसे संवाद करना आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की इस कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली के लिए एक नजीर बन सकती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!