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जालौन: नाबालिग को भगाने के मामले में दोषी को 10 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

जालौन की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के लगभग चार साल पुराने मामले में एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 23 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
जालौन: नाबालिग को भगाने के मामले में दोषी को 10 साल की सजा, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
मूल स्रोत

चार साल पुराने मामले में आया फैसला

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने इस मामले में आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे न भरने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

यह मामला लगभग चार साल पुराना है, जिसमें कुठौंद थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग किशोरी के अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत के इस निर्णय को पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों की सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ठोस साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर न्यायाधीश ने यह सजा मुकर्रर की है।

क्या थी पूरी घटना

मामले की जानकारी देते हुए शासकीय अधिवक्ताओं ने बताया कि घटना 4 अक्टूबर 2021 की है। आरोपी अजय उर्फ पिंटू पर आरोप था कि उसने 17 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने की वारदात को अंजाम दिया था। किशोरी के परिजनों ने तत्काल कुठौंद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने अपहरण और पॉक्सो एक्ट की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए किशोरी की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन किया था। करीब तीन महीने की कड़ी मशक्कत के बाद, 18 दिसंबर 2021 को पुलिस ने किशोरी को मथुरा से बरामद किया। उस समय किशोरी आरोपी अजय उर्फ पिंटू के कब्जे में थी। पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्य

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच की और 8 जनवरी 2022 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। कानूनी प्रक्रिया के तहत 11 मई 2022 को आरोपी के विरुद्ध आरोप तय किए गए, जिसके बाद नियमित सुनवाई का दौर शुरू हुआ। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी बात मजबूती से रखी और पांच महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराए।

अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने आरोपी के खिलाफ मामले को स्पष्ट कर दिया। बचाव पक्ष की दलीलों के बावजूद, अदालत ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर अजय उर्फ पिंटू को दोषी माना। पॉक्सो कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है और क्षेत्र में इस मामले की काफी चर्चा है।

कानूनी प्रावधान और संदेश

पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में अदालतें लगातार सख्त रुख अपना रही हैं। इस मामले में 10 साल की सजा यह दर्शाती है कि नाबालिगों के अपहरण और उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बहलाने-फुसलाने के मामलों में कानून कोई रियायत नहीं बरतता है। 23 हजार रुपये का जुर्माना भी इसी कठोरता का हिस्सा है।

न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिगों की सुरक्षा समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह के अपराधों में लिप्त व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दी जाएगी। यह निर्णय न केवल पीड़ित के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि समाज में इस तरह के अपराध करने वालों के लिए एक चेतावनी भी है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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