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जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत 7 आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित

जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में पिछले तीन महीने से जेल में बंद पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 7 आरोपियों की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें
जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत 7 आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित
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हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई का दौर पूरा हो गया है। पिछले तीन महीनों से न्यायिक हिरासत में बंद पूर्व मंत्री महेश जोशी और तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुबोध अग्रवाल सहित सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की अदालत ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि विभाग को जैसे ही अनियमितताओं की शिकायत मिली, उन्होंने तुरंत प्रभाव से संबंधित कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। पूर्व मंत्री की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि उनके कार्यकाल के दौरान विभाग द्वारा किए गए कुल 140 टेंडरों में से मात्र चार टेंडर ही उनके और एसीएस के कार्यकाल में हुए थे, ऐसे में पूरे घोटाले की जिम्मेदारी उन पर डालना तर्कसंगत नहीं है।

सरकारी वकील ने लगाए गंभीर आरोप

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि घोटाले में शामिल कंपनियों के प्रोपराइटर पदमचंद जैन और महेश मित्तल का प्रभाव इतना अधिक था कि वे पीएचईडी विभाग में अधिकारियों की नियुक्ति तक अपनी मर्जी से करवाते थे। उन्होंने एसीबी द्वारा रिकॉर्ड किए गए फोन कॉल्स का हवाला देते हुए कहा कि आरोपियों को पहले से ही पता था कि जांच के लिए गठित होने वाली हाईपावर कमेटी का अध्यक्ष कौन होगा।

सरकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि मंत्री और एसीएस स्तर पर मिलीभगत से कंपनियों को करोड़ों का अनुचित लाभ पहुंचाया गया। यहां तक कि इरकॉन द्वारा फर्जी सर्टिफिकेट की आधिकारिक पुष्टि होने के बावजूद, हाईपावर कमेटी ने कंपनियों को भुगतान जारी रखा। इसके अलावा, महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया के माध्यम से करीब 50 लाख रुपये की राशि पूर्व मंत्री के बेटे रोहित जोशी की फर्म में ट्रांसफर होने का भी दावा किया गया है।

बचाव पक्ष का कानूनी तर्क

महेश जोशी के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि एसीबी ने कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए राज्यपाल की अनिवार्य मंजूरी मिलने से पूर्व ही प्रारंभिक अनुसंधान शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि ईडी की गिरफ्तारी के बाद सात महीने तक हिरासत में रहने के बावजूद एसीबी ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की थी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता पर सवाल खड़े होते हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग उनके मंत्री बनने से काफी पहले से हो रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनी है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी हैं, जो पूर्व मंत्री और अन्य आरोपियों की रिहाई या जेल में रहने की स्थिति को स्पष्ट करेगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद ही तय होगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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