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जैसलमेर नगर परिषद चुनाव: वार्डों के परिसीमन से बिगड़ा चुनावी गणित, मतदाताओं की संख्या में भारी अंतर

जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों में मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड नंबर 17 में सबसे कम 447 और वार्ड नंबर 39 में सबसे ज्यादा 1287 मतदाता हैं।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

21 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
जैसलमेर नगर परिषद चुनाव: वार्डों के परिसीमन से बिगड़ा चुनावी गणित, मतदाताओं की संख्या में भारी अंतर
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जैसलमेर नगर परिषद के आगामी चुनावों को लेकर जारी नए परिसीमन के बाद वार्डों के चुनावी गणित में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर के 45 वार्डों में मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता सामने आई है। एक ओर जहां कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या काफी कम है, वहीं दूसरी ओर कई वार्डों में यह आंकड़ा एक हजार के पार पहुंच गया है, जिससे राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

वार्डों के बीच मतदाताओं का असंतुलन

नगर परिषद के कुल 45 वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या 35,145 है। यदि इस संख्या को समान रूप से विभाजित किया जाए, तो प्रति वार्ड औसतन 781 मतदाता होने चाहिए। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। वार्ड नंबर 17 में सबसे कम 447 मतदाता हैं, जबकि वार्ड नंबर 39 में यह संख्या बढ़कर 1,287 तक पहुंच गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि 45 में से 9 वार्ड ऐसे हैं जहां मतदाताओं की संख्या 1,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है।

सबसे छोटे और सबसे बड़े वार्ड के बीच 840 मतदाताओं का अंतर चुनावी तैयारियों पर सीधा असर डाल रहा है। कम मतदाताओं वाले वार्डों में उम्मीदवारों के लिए घर-घर संपर्क करना और मतदाताओं तक पहुंच बनाना सरल है, जबकि अधिक मतदाता वाले वार्डों में प्रत्याशियों को अधिक संसाधन, समय और कार्यकर्ताओं की आवश्यकता होगी। यह अंतर चुनावी बजट और प्रचार की तीव्रता को भी प्रभावित करेगा।

पुराने दिग्गजों के लिए बढ़ी चुनौती

परिसीमन के कारण न केवल वार्डों की भौगोलिक सीमाएं बदली हैं, बल्कि मोहल्लों के फेरबदल से जातीय समीकरण भी पूरी तरह उलझ गए हैं। जो नेता वर्षों से अपने वार्डों को सुरक्षित मानकर निश्चिंत थे, अब उन्हें नए सिरे से अपनी जमीन तलाशनी पड़ रही है। वार्डों के पुनर्गठन से उनके पुराने समर्थक दूसरे क्षेत्रों में चले गए हैं, जिससे कई दिग्गज नेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं और उन्हें अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए नए समीकरण बिठाने पड़ रहे हैं।

राजनीतिक दलों के लिए यह स्थिति एक बड़ी पहेली बन गई है। पार्टियां अब ऐसे प्रत्याशियों की तलाश कर रही हैं जिनकी पकड़ नए परिसीमन के बाद बने वार्डों में भी मजबूत हो। निर्दलीय दावेदार भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के आधार पर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वार्डों की बदली हुई सीमाओं के कारण अब चुनावी मुकाबला पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प होने की संभावना है।

चुनावी रणनीति में बदलाव की आवश्यकता

निकाय चुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। परिसीमन के बाद बने नए वार्डों में मतदाताओं का मिजाज समझना अब प्रत्याशियों की प्राथमिकता बन गया है। पुराने वोट बैंक के भरोसे रहने वाले उम्मीदवारों को अब नए क्षेत्रों में अपनी पैठ बनानी होगी। इसके लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान और स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि परिसीमन का यह बदलाव किस राजनीतिक दल या उम्मीदवार के लिए फायदेमंद साबित होता है। मतदाता संख्या में यह भारी अंतर केवल प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारक बन चुका है। जैसलमेर के मतदाता अब इस बदले हुए चुनावी ढांचे के बीच अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए तैयार हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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