कांग्रेस नेता जयराम रमेश की मुश्किलें बढ़ीं: हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी को लेकर संभल कोर्ट में परिवाद दर्ज
संभल में चंदौसी कोर्ट में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के खिलाफ बुधवार को परिवाद दाखिल किया गया। हिंदू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने यह परिवाद दायर किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

संभल की अदालत में कांग्रेस सांसद के खिलाफ शिकायत
उत्तर प्रदेश के संभल जिले की चंदौसी अदालत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश के खिलाफ एक परिवाद दाखिल किया गया है। यह शिकायत हिंदू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई है। मामले में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेता ने सार्वजनिक मंच से हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक तुलना की है, जिससे सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला भोपाल में आयोजित एक जनसभा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जयराम रमेश ने अपने संबोधन के दौरान सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तुलना महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना से की थी। इस बयान को लेकर हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है और इसे सीधे तौर पर आस्था पर प्रहार माना जा रहा है।
कानूनी प्रक्रिया और अदालत का रुख
अधिवक्ता प्रसून कुमार के माध्यम से दायर इस परिवाद को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदित्य सिंह की अदालत में प्रस्तुत किया गया है। शिकायतकर्ता ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाने से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि देश के विभाजन से जुड़े व्यक्तियों के साथ हिंदू देवी-देवताओं की तुलना करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समाज में वैमनस्य फैलाने वाला कृत्य भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, जिसके लिए उचित कानूनी दंड आवश्यक है।
पहले भी चर्चा में रहा है शिकायतकर्ता का रुख
यह पहली बार नहीं है जब हिंदू शक्ति दल के अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने किसी बड़े राजनीतिक नेता के खिलाफ चंदौसी अदालत का दरवाजा खटखटाया हो। इससे पूर्व, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ भी एक याचिका दायर की थी। उस मामले में आरोप था कि राहुल गांधी ने 'इंडियन स्टेट' के खिलाफ बयान दिया था। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नवंबर 2025 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था।
वर्तमान मामले में अब सबकी निगाहें 18 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत द्वारा मांगी गई पुलिस रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल, इस विवादित बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर हो सकते हैं।
धार्मिक भावनाओं का मुद्दा और भविष्य की स्थिति
धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के संदर्भ में नेताओं द्वारा दिए जाने वाले बयानों पर अक्सर कानूनी विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। भारतीय दंड संहिता के तहत धार्मिक भावनाओं को आहत करने के प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में अक्सर अदालती हस्तक्षेप की मांग की जाती है। संभल का यह मामला भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां अदालत यह तय करेगी कि क्या जयराम रमेश के बयान में कानूनी उल्लंघन हुआ है।
आने वाले दिनों में पुलिस की रिपोर्ट और अदालत का निर्णय यह स्पष्ट करेगा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होती है या नहीं। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों और बयानों की बारीकी से जांच करना ही अदालत की प्राथमिकता होगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!