जयपुर: SMS अस्पताल के डॉक्टरों ने किया चमत्कार, ब्लेड से कटे युवक के प्राइवेट पार्ट को दोबारा जोड़ा
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के डॉक्टरों ने 29 साल के युवक के कटे हुए प्राइवेट पार्ट को ऑपरेशन के जरिए दोबारा जोड़ दिया है। 31 मई को प्रेमिका ने युवक के प्राइवेट पार्ट को ब्लेड से काट दिया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल की प्लास्टिक और रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग की टीम ने एक 29 वर्षीय युवक के कटे हुए प्राइवेट पार्ट को जटिल ऑपरेशन के जरिए सफलतापूर्वक दोबारा जोड़ दिया है। करीब 40 दिनों के गहन उपचार और निगरानी के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।
घटना और तत्काल उपचार
यह घटना 31 मई की है, जब एक विवाद के चलते युवक की प्रेमिका ने ब्लेड से हमला कर उसके प्राइवेट पार्ट को काट दिया था। गंभीर रूप से घायल युवक को घटना के महज चार घंटे के भीतर एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया। विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार जैन के मार्गदर्शन में यूनिट हेड डॉ. संगीता ठाकुरानी की टीम ने उसी रात इमरजेंसी ऑपरेशन को अंजाम दिया।
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कटे हुए यूरिन पाइप और क्षतिग्रस्त ऊतकों को जोड़ने की थी। डॉ. जैन ने बताया कि इस प्रक्रिया को बेहद बारीकी से स्टेप-बाय-स्टेप पूरा किया गया। ऑपरेशन के बाद भी मरीज को लंबी निगरानी में रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंग में रक्त संचार और कार्यक्षमता वापस आ गई है। 40 दिनों के बाद मरीज अब सामान्य रूप से पेशाब करने में सक्षम है, जो डॉक्टरों की मेहनत का परिणाम है।
प्लास्टिक सर्जरी की अहमियत
इस सफल सर्जरी के बाद डॉ. राकेश कुमार जैन ने प्लास्टिक सर्जरी के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक सर्जरी केवल सुंदरता बढ़ाने या कॉस्मेटिक उद्देश्यों तक सीमित नहीं है। गंभीर हादसों में अंग कटने, जलने, कैंसर के उपचार के बाद शरीर के अंगों को पुनर्निर्मित करने और जन्मजात शारीरिक कमियों को सुधारने में इस विधा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि ऐसी चोटों में 'गोल्डन ऑवर' यानी शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को सही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास पहुँचा दिया जाए, तो कटे हुए अंगों को भी दोबारा जोड़कर बचाया जा सकता है, जिन्हें अक्सर लोग बेकार मानकर छोड़ देते हैं।
डॉक्टरों की सलाह
यूनिट हेड डॉ. संगीता ठाकुरानी ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी गंभीर दुर्घटना या अंग कटने की स्थिति में समय बिल्कुल बर्बाद न करें। उन्होंने सलाह दी कि मरीज को तुरंत ऐसे बड़े अस्पताल ले जाना चाहिए जहाँ प्लास्टिक और रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। समय पर अस्पताल पहुंचना ही इलाज की सफलता की पहली शर्त है।
इस मामले ने एक बार फिर एसएमएस अस्पताल की चिकित्सा क्षमता को सिद्ध किया है। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने मरीज की रिकवरी पर संतोष व्यक्त किया है। फिलहाल, युवक पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, हालांकि उसे अभी भी नियमित फॉलो-अप के लिए डॉक्टरों के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की थी, जिसमें घटना के पीछे के कारणों और परिस्थितियों का पता लगाया गया था। फिलहाल, मरीज की शारीरिक स्थिति में सुधार होना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी राहत और सफलता मानी जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!