जयपुर: पुरानी हवेली की खुदाई में मिला खजाना, ठेकेदार और मजदूरों ने आपस में बांटे मुगलकालीन सिक्के
चांदी के 1500 मुगलकालीन सिक्कों को 5 लोगों ने बराबर हिस्से 300-300 में बांट लिया था। एक मजदूर ने सिक्के बेचकर 9 लाख कमाए, एक ने बेटी की शादी में खर्च कर दिए।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

जयपुर के विद्याधर जी का रास्ता स्थित एक 200 साल पुरानी हवेली की खुदाई के दौरान मिले खजाने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हवेली को गिराने का काम कर रहे ठेकेदार और मजदूरों ने खजाने को आपस में बांट लिया था। पुलिस जांच में पता चला है कि खुदाई में मुगलकालीन चांदी के 1500 सिक्के और 160 साल पुरानी चांदी की दो भारी सिल्लियां मिली थीं, जिन्हें आरोपियों ने गुप्त रूप से ठिकाने लगा दिया।
खजाने का बंदरबांट और आरोपियों की करतूत
पुलिस के अनुसार, इस काम में शामिल पांच लोगों ने चांदी के 1500 सिक्कों को बराबर हिस्सों में बांट लिया था, जिसके तहत हर व्यक्ति को 300 सिक्के मिले। ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक ने मजदूर अनुज अरोड़ा के साथ मिलकर अपने हिस्से के सिक्कों को गलाकर बाजार में 9 लाख रुपये में बेच दिया। वहीं, अन्य मजदूरों ने भी इन सिक्कों का इस्तेमाल अपने निजी खर्चों के लिए किया। एक मजदूर ने अपनी बेटी की शादी में पैसे खर्च किए, तो दूसरे ने कर्ज चुकाने के लिए सिक्के बेचे।
इस मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू एक मजदूर रजनी मल्होत्रा का है। उसने अपने हिस्से के सिक्के बेचने के बजाय शराब की दुकानों पर भुगतान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। जब वह बार-बार चांदी का सिक्का लेकर शराब खरीदने पहुंचा, तो सेल्समैन को संदेह हुआ। पुलिस ने जब उसके घर की तलाशी ली, तो केवल 12 सिक्के बरामद हुए, जिससे पुष्टि हुई कि उसने बाकी सिक्के शराब पीने में उड़ा दिए।
लंदन के बैंक की सिल्लियां और जांच का दायरा
खुदाई में मिली चांदी की दो सिल्लियों का वजन क्रमशः 31 किलो और 35 किलो है। जांच में सामने आया है कि ये सिल्लियां 1860 में जारी की गई थीं और इन पर लंदन के सेंट्रल बैंक (बैंक ऑफ इंग्लैंड) की मुहर लगी है। ठेकेदार ने इन सिल्लियों के बारे में मजदूरों से भी जानकारी छिपाई थी। पुलिस ने अब तक कुल 16 सिक्के और ये दो सिल्लियां बरामद की हैं, जिनकी शुद्धता 99.9 फीसदी तक पाई गई है।
हवेली में सोने का कलश मिलने की भी चर्चाएं थीं, जिसे लेकर पुलिस ने आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की। वैज्ञानिक तरीकों, क्रॉस वेरिफिकेशन और आमने-सामने बैठाकर की गई पूछताछ के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि खुदाई में केवल चांदी के सिक्के और सिल्लियां ही मिली थीं। सोने के कलश का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिला है।
कैसे खुला खजाने का राज?
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मजदूर अनुज अरोड़ा को लगा कि ठेकेदार ने उसे कम सिक्के दिए हैं। विवाद बढ़ने पर वह हवेली के मालिक राहुल सेठी से शिकायत करने पहुंच गया। इस दौरान उसकी बातचीत रिकॉर्ड हो गई और हवेली मालिक को पता चल गया कि उनके घर की खुदाई में निकला खजाना मजदूरों ने आपस में बांट लिया है। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया और जांच शुरू हुई।
फिलहाल, माणक चौक थाना पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों द्वारा बेचे गए बाकी सिक्कों और अन्य संभावित संपत्तियों की तलाश जारी है। यह घटना ऐतिहासिक धरोहरों की खुदाई के दौरान सुरक्षा और निगरानी की कमी को भी उजागर करती है, जिसका फायदा उठाकर मजदूरों ने करोड़ों के खजाने को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल कर लिया।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!