जयपुर में नकली नोटों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: बांग्लादेश से हरियाणा होते हुए पहुंच रही थी खेप, 4 गिरफ्तार
ढाका में छपते थे नकली नोट, कोलकाता से हरियाणा और फिर जयपुर पहुंची खेप; 1 लाख के बदले 5 लाख की नकली करेंसी, USDT से होता था भुगतान

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

जयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश
जयपुर पुलिस और सीएसटी (CST) की संयुक्त टीम ने नकली नोटों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 4.30 लाख रुपये से अधिक की नकली भारतीय मुद्रा जब्त की है। मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो हरियाणा के रोहतक और सीकर के रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो लग्जरी गाड़ियां, स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर भी बरामद की हैं, जिनका उपयोग इस अवैध खेप को लाने में किया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अंशुल, साहिल चौधरी, प्रियांशु और आकाश के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और इनका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। बरामद किए गए नोटों में सभी 500-500 रुपये के हैं, जिनकी कुल संख्या 861 है।
ढाका से कोलकाता और फिर जयपुर तक का सफर
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन नकली नोटों की छपाई बांग्लादेश की राजधानी ढाका में की जा रही थी। वहां से इन नोटों को तस्करी के जरिए कोलकाता लाया जाता था। कोलकाता में इस नेटवर्क का मुख्य सरगना अमन राणा बैठा है, जो वहां से पूरे भारत में नकली नोटों की सप्लाई चेन को नियंत्रित कर रहा है। कोलकाता से यह खेप हरियाणा पहुंचाई गई और वहां से इसे जयपुर भेजा गया।
पुलिस को शक है कि यह खेप केवल एक परीक्षण (टेस्ट) के तौर पर जयपुर भेजी गई थी। गिरोह का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों के दौरान जयपुर और आसपास के इलाकों में नकली नोटों की एक बड़ी खेप को बाजार में खपाना था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या जयपुर में इस गिरोह के और भी स्थानीय मददगार सक्रिय हैं।
क्रिप्टो करेंसी का उपयोग और डिजिटल फुटप्रिंट
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी अपने लेनदेन के लिए पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के बजाय यूएसडीटी (USDT) जैसी क्रिप्टो करेंसी का उपयोग कर रहे थे। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचना था। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनमें 23 मई 2025 को कोलकाता यात्रा से संबंधित वीडियो भी शामिल हैं, जो उनके लंबे समय से सक्रिय होने की पुष्टि करते हैं।
आरोपियों का आर्थिक मॉडल भी बेहद शातिर था। वे एक लाख रुपये के असली नोट के बदले पांच लाख रुपये की नकली करेंसी उपलब्ध कराते थे। आरोपियों की जीवनशैली, उनके महंगे फोन और विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड से पता चलता है कि वे लंबे समय से इस अवैध कारोबार से भारी मुनाफा कमा रहे थे।
आगे की जांच और पुलिस की रणनीति
पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए बजाज नगर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस की विशेष टीमें रोहतक और कोलकाता भेजी जा रही हैं। मुख्य आरोपी अमन राणा की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इसके अलावा, बरामद नकली करेंसी की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी दे दी गई है ताकि नोटों की गुणवत्ता और छपाई के तरीके का विश्लेषण किया जा सके।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके संपर्कों का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है। फिलहाल, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितनी नकली मुद्रा बाजार में उतारी है और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!