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जयपुर में सीएनजी की भारी किल्लत: पंपों पर लंबी कतारों से वाहन चालक परेशान, विवादों का दौर शुरू

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

20 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
जयपुर में सीएनजी की भारी किल्लत: पंपों पर लंबी कतारों से वाहन चालक परेशान, विवादों का दौर शुरू
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जयपुर में सीएनजी पंपों पर वाहनों का भारी दबाव

राजधानी जयपुर में सीएनजी वाहनों की बढ़ती संख्या और ईंधन स्टेशनों की सीमित क्षमता के कारण शहर के कई पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई बार कतारें सड़क तक पहुंच जाती हैं, जिससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ स्थानीय दुकानदारों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में वर्तमान में करीब 7 लाख सीएनजी वाहन पंजीकृत हैं, जिनकी दैनिक खपत लगभग 1.75 लाख लीटर तक पहुंच गई है।

हाल ही में मांग्यावास के वीटी रोड स्थित एक सीएनजी पंप पर लंबी कतार को लेकर वाहन चालकों और दुकानदारों के बीच तीखी बहस हो गई। यह विवाद देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया, जिसमें एक महिला के सिर में चोट आई। सूचना मिलने पर नारायण विहार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले गई। हालांकि, आपसी समझाइश के बाद मामला शांत हो गया और किसी भी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।

समय और क्षमता का गणित: आखिर क्यों लगती हैं लंबी लाइनें?

पंप संचालकों के अनुसार, सीएनजी भरने की प्रक्रिया में लगने वाला समय ही कतारों का मुख्य कारण है। एक सीएनजी कार के टैंक में औसतन 8 किलो गैस भरी जाती है, जबकि ऑटो में 3.5 से 4 किलो की खपत होती है। एक वाहन को गैस भरने में कम से कम 4 से 5 मिनट का समय लगता है। इस हिसाब से एक डिस्पेंसिंग नोजल की क्षमता प्रति घंटे अधिकतम 12 वाहनों की ही होती है।

यदि किसी पंप पर दो नोजल काम कर रहे हैं, तो वहां एक घंटे में केवल 24 वाहन ही गैस भरवा सकते हैं। चार नोजल वाले पंपों पर यह संख्या 48 तक सीमित रहती है। वाहनों की भारी भीड़ और सीमित डिस्पेंसर के कारण अक्सर पंपों पर अव्यवस्था फैल जाती है, जिससे वाहन चालकों के बीच आगे निकलने की होड़ मचती है और विवाद की स्थिति पैदा होती है।

पंपों की सीमित संख्या और बढ़ती मांग

जयपुर में कुल 53 सीएनजी पंप संचालित हैं, जिनमें से केवल 8 पंप ही 24 घंटे सेवा प्रदान करते हैं। शहर में लगभग ढाई लाख टैक्सी वाहन हैं, जो निजी वाहनों के मुकाबले कहीं अधिक दूरी तय करते हैं और उन्हें बार-बार गैस भरवाने की आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्र में 36 और राष्ट्रीय राजमार्गों पर 17 पंप स्थित हैं, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह संख्या नाकाफी साबित हो रही है।

आंकड़ों के अनुसार, शहर के चार प्रमुख पंप ऐसे हैं जहां केवल सीएनजी की बिक्री होती है, और वहां प्रतिदिन 12 हजार लीटर तक की खपत दर्ज की जाती है। वहीं, अन्य ईंधन के साथ सीएनजी बेचने वाले पंपों पर औसतन 5 हजार लीटर की खपत होती है। सभी पंपों को मिलाकर कुल दैनिक खपत 2 लाख लीटर के करीब पहुंच रही है, जो बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाल रही है।

प्रशासनिक और व्यावहारिक चुनौतियां

पंपों पर अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कुछ जगहों पर गार्ड तैनात किए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर वाहन चालक स्वयं कतारों का प्रबंधन करते हैं। इससे अक्सर सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। दुकानदारों का कहना है कि उनके प्रतिष्ठानों के सामने वाहनों की लंबी कतारें लगने से ग्राहकों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।

सीएनजी वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ईंधन स्टेशनों की संख्या में वृद्धि न होना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यदि भविष्य में सीएनजी वाहनों की संख्या में और इजाफा होता है, तो मौजूदा पंपों पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर और अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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