कुरुक्षेत्र में भक्ति का सैलाब: इस्कॉन की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ को क्रेन से अर्पित किया गया 56 भोग
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में शुक्रवार शाम को इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) की ओर से भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। पूरे यात्रा मार्ग पर जय जगन्नाथ और हरे कृष्ण के जयघोष गूंजते रहे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

हरियाणा के ऐतिहासिक शहर कुरुक्षेत्र में शुक्रवार की शाम भक्ति के रंग में डूबी नजर आई। इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) द्वारा आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा ने शहर के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। ब्रह्मसरोवर के समीप स्थित गौड़िया मठ से शुरू हुई इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी के रथों के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
क्रेन के जरिए अर्पित किया गया 56 भोग
इस रथ यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया गया 56 प्रकार का विशेष भोग रहा। रथ की ऊंचाई अधिक होने के कारण, भक्तों ने क्रेन की सहायता से भगवान को यह विशाल भोग अर्पित किया। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। जैसे ही क्रेन के जरिए भोग ऊपर ले जाया गया, पूरा इलाका 'जय जगन्नाथ' और 'हरे कृष्ण' के जयघोष से गूंज उठा।
यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी इस अवसर पर सेवा कार्य किए और राहगीरों के लिए पेयजल, फल और प्रसाद की व्यवस्था की। रथ यात्रा से पूर्व ज्योतिसर स्थित इस्कॉन के श्री कृष्ण-अर्जुन मंदिर में भगवान की विशेष आरती और राजभोग का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
देशभर से जुटे श्रद्धालु
कुरुक्षेत्र में आयोजित इस रथ यात्रा में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि हरियाणा के विभिन्न जिलों जैसे कैथल, करनाल, पानीपत, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, रोहतक, सोनीपत और चंडीगढ़ से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और असम जैसे दूरदराज के राज्यों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर हरिनाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु रथ के साथ-साथ चल रहे थे। कुरुक्षेत्र की सड़कों पर भक्ति का ऐसा माहौल था कि हर कोई कृष्ण भक्ति में लीन नजर आया।
नए मंदिर परिसर में हुई स्थापना
इस वर्ष की रथ यात्रा इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि श्री श्री गौर-निताई और श्री श्री जगन्नाथ-बलदेव-सुभद्रा महारानी अब नए मंदिर परिसर में विराजमान हो चुके हैं। भक्तों के लिए यह एक अत्यंत हर्ष का विषय रहा। रथ यात्रा का समापन देर रात सेक्टर-13 स्थित कम्युनिटी सेंटर में हुआ, जहां भगवान की महाआरती के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।
आयोजकों ने बताया कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे और शांति का संदेश भी फैलाते हैं। कुरुक्षेत्र की इस रथ यात्रा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि धर्म और आस्था के प्रति लोगों का समर्पण आज भी अटूट है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!