इंदौर: रिटायर्ड बैंक मैनेजर से जमीन के नाम पर 62 लाख की ठगी, चार साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा
इंदौर के राजेन्द्र नगर मे करीब 4 साल से थाना प्रभारियो के चक्कर लगा रहे एक रिटायर्ड बुजुर्ग व्यक्ति को डीसीपी जोन 1 ने न्याय दिलाया। उन्होने मामले मे जांच करवाने के बाद पीडित की शिकायत पर दो रिश्तेदारो पर धोखाधडी के मामले मे एफआइआर कराई है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

चार साल के संघर्ष के बाद मिली न्याय की उम्मीद
इंदौर के राजेंद्र नगर इलाके में एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर के साथ जमीन के सौदे के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित पिछले चार वर्षों से पुलिस थानों के चक्कर काट रहा था, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल पा रहा था। अंततः डीसीपी जोन-1 नरेंद्र रावत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पीड़ित अतुल पंडित, जो ग्रामीण बैंक से वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके ही रिश्तेदारों ने उन्हें निवेश का झांसा देकर ठगा है। आरोपियों ने उनसे कुल 62 लाख 50 हजार रुपये की राशि ली थी, लेकिन न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया।
निवेश के नाम पर रची गई साजिश
मामले की शुरुआत अप्रैल 2021 में हुई, जब अतुल पंडित सेवानिवृत्त हुए थे। उनके रिश्तेदार हरीश ने उन्हें बिजलपुर में स्थित एक कृषि भूमि दिखाई और दावा किया कि भविष्य में इस जमीन की व्यावसायिक कीमत काफी बढ़ जाएगी। इस झांसे में आकर अतुल पंडित ने जून 2022 तक किस्तों में 62.50 लाख रुपये आरोपियों को सौंप दिए। इनमें से कुछ राशि हरीश के भांजे योगेश के बैंक खाते में भी ट्रांसफर की गई थी।
समय बीतने के साथ जब न तो रजिस्ट्री हुई और न ही जमीन का मालिकाना हक मिला, तो पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोपियों ने दबाव में आकर 31 लाख 90 हजार रुपये तो लौटा दिए, लेकिन शेष राशि देने से साफ इनकार कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने बाकी पैसों के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी उन्हें आत्महत्या करने और झूठे केस में फंसाने की धमकियां देने लगे।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अतुल पंडित ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से राजेंद्र नगर थाने के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने तत्कालीन डीसीपी स्तर के अधिकारियों से भी गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बार-बार थानों के चक्कर काटने से उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
हाल ही में जब उन्होंने डीसीपी जोन-1 नरेंद्र रावत से मुलाकात की और अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज सौंपे, तब जाकर मामले ने तूल पकड़ा। डीसीपी ने दस्तावेजों की गहन जांच करवाई और प्रथम दृष्टया मामला सही पाए जाने पर राजेंद्र नगर पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
राजेंद्र नगर पुलिस ने हरीश और योगेश के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही दोनों आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस अब जमीन से संबंधित दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है ताकि आरोपियों की भूमिका को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जमीन के सौदों में बिना उचित कानूनी पड़ताल के निवेश करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और मामले की विवेचना जारी है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!