इंदौर में चिकित्सा जगत की नई उपलब्धि: बिना ऑपरेशन और बड़े चीरे के अब हटेगी ब्रेस्ट की गांठ
ब्रेस्ट फाइब्रोएडेनोमा (स्तन की गैर-कैंसरयुक्त गांठ) के इलाज में अब महिलाओं को बड़ी सर्जरी और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होगी। इंदौर में पहली बार वैक्यूम असिस्टेड एक्सिशन (VAE) तकनीक की शुरुआत की गई है, जिसके जरिए केवल 2–3 मिलीमीटर के छोटे चीरे से बिना ओपन सर्जरी गांठ को निकाला जा सकता है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

इंदौर के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार की शुरुआत हुई है, जो स्तन की गांठ से पीड़ित महिलाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब ब्रेस्ट फाइब्रोएडेनोमा यानी स्तन की गैर-कैंसरयुक्त गांठों को हटाने के लिए महिलाओं को बड़ी सर्जरी या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं होगी। शहर में पहली बार वैक्यूम असिस्टेड एक्सिशन (VAE) तकनीक को लागू किया गया है, जो उपचार की प्रक्रिया को अत्यंत सरल और सुरक्षित बनाती है।
क्या है वैक्यूम असिस्टेड एक्सिशन तकनीक?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्यूम असिस्टेड एक्सिशन (VAE) एक आधुनिक चिकित्सा पद्धति है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गांठ को निकालने के लिए शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता है। केवल 2 से 3 मिलीमीटर के एक छोटे से प्रवेश बिंदु के माध्यम से ही पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से लोकल एनेस्थीसिया के प्रभाव में की जाती है, जिससे मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया के जोखिमों से भी मुक्ति मिलती है।
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निशांत भार्गव ने स्पष्ट किया कि इस तकनीक में न तो बड़े टांकों की जरूरत पड़ती है और न ही मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रुकना पड़ता है। चूंकि चीरा बहुत छोटा होता है, इसलिए रक्तस्राव की संभावना न के बराबर होती है और रिकवरी भी काफी तेजी से होती है।
फाइब्रोएडेनोमा और इसके उपचार की आवश्यकता
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक उडिया ने बताया कि फाइब्रोएडेनोमा स्तन में होने वाली एक सामान्य और गैर-कैंसरयुक्त गांठ है, जो अक्सर कम उम्र की युवतियों में देखी जाती है। यद्यपि अधिकांश मामलों में यह गांठ दर्दरहित होती है, लेकिन यदि इसका आकार लगातार बढ़ रहा हो या यह किसी प्रकार की शारीरिक असुविधा पैदा कर रही हो, तो इसका उपचार कराना अनिवार्य हो जाता है। समय पर सही जांच और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।
डॉ. शैलेश गुप्ता के अनुसार, यह तकनीक उन मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है जिनमें क्लीनिकल जांच और इमेजिंग के माध्यम से फाइब्रोएडेनोमा की पुष्टि हो चुकी है। इस प्रक्रिया में गांठ के आसपास के स्वस्थ ऊतकों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है, जिससे उपचार के बाद कॉस्मेटिक परिणाम भी बेहतर मिलते हैं और स्तन पर निशान न के बराबर दिखाई देते हैं।
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर विकल्प
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्यूम असिस्टेड एक्सिशन एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सुरक्षित तकनीक है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में यह मरीजों को अधिक आरामदायक विकल्प प्रदान करती है। इसमें दर्द कम होता है और मरीज बहुत कम समय में अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं।
यह नई तकनीक इंदौर के अस्पतालों में उपलब्ध होने से अब महिलाओं को स्तन की गांठ के इलाज के लिए बड़ी सर्जरी के डर से मुक्ति मिलेगी। चिकित्सा जगत में इसे एक बड़ा सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है, जो न केवल इलाज को सुलभ बनाएगा बल्कि मरीजों के मानसिक तनाव को भी कम करेगा।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी महिला को स्तन में किसी भी प्रकार की गांठ महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत रेडियोलॉजिस्ट या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। आधुनिक इमेजिंग और नई तकनीकों के माध्यम से अब इन समस्याओं का समाधान बिना किसी बड़े ऑपरेशन के संभव है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!