हाई कोर्ट की ई-हियरिंग में तकनीकी गड़बड़ी पर सख्त रुख, आईटी टीम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
हाई कोर्ट की नई वेबसाइट पर ई-हियरिंग के दौरान लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि पोर्टल का ई-हियरिंग को ठीक से सपोर्ट नहीं करना आईटी स्टाफ की कार्यप्रणाली और क्षमता पर सवाल खड़े करता है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

ई-हियरिंग में बाधा पर हाई कोर्ट की नाराजगी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी नई वेबसाइट पर ई-हियरिंग के दौरान आ रही बार-बार की तकनीकी समस्याओं को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कारण समय का नुकसान कतई स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोर्टल का ई-हियरिंग को सही ढंग से सपोर्ट न कर पाना आईटी विभाग की कार्यक्षमता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, बेंच ने चीफ जस्टिस से संबंधित आईटी स्टाफ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। रजिस्ट्रार (आईटी-सीएसए) केएस कुशवाहा को निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान कर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
आईटी सिस्टम का होगा स्वतंत्र ऑडिट
अदालत ने केवल वर्तमान खामियों पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि भविष्य के लिए भी सख्त निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने अपने संपूर्ण आईटी सिस्टम और नई वेबसाइट का स्वतंत्र ऑडिट कराने का आदेश दिया है। इस ऑडिट के लिए टीसीएस, इंफोसिस या एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनियों के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सी-डॉट और नैस्कॉम के अधिकारियों को भी इस विशेष ऑडिट टीम में शामिल किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए 30 दिनों की समय सीमा तय की गई है।
यह आदेश आदित्य सोनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान 8 सितंबर 2026 को पारित किया गया। सुनवाई के दौरान मौजूद वकीलों ने भी नई वेबसाइट में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया और पुरानी वेबसाइट को अधिक सुगम बताया। रजिस्ट्रार केएस कुशवाहा की मौजूदगी में जब सिस्टम की जांच की गई, तो वेबसाइट के हैंग होने और बफरिंग जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं।
दावों के बावजूद सुधार नदारद
वेबसाइट की तकनीकी स्थिति को लेकर पहले भी आश्वासन दिए गए थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जजों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजकर यह जानकारी दी थी कि वेबसाइट अपडेट करने में लगभग आठ दिन का समय लगेगा। हालांकि, 15 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद, नई वेबसाइट का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया है, जिसके कारण न्यायिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।
हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख यह संदेश देता है कि डिजिटल युग में न्यायिक प्रणाली की तकनीकी दक्षता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें सात दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में वेबसाइट के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है ताकि वकीलों और वादियों को सुचारू रूप से ई-हियरिंग की सुविधा मिल सके।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!