हरदा में भरभराकर गिरा 100 साल पुराना मकान, प्रशासन की लापरवाही से टला बड़ा हादसा
हरदा के वार्ड क्रमांक 22 कुलहरदा में दुर्गा मंदिर के पीछे आज सुबह करीब 7:14 बजे एक 100 साल पुराना जर्जर मकान ढह गया। हादसे के वक्त मकान में किराएदार का परिवार मौजूद था, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। वार्ड क्रमांक 22 स्थित कुलहरदा इलाके में दुर्गा मंदिर के पीछे बना एक 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक ढह गया। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि मकान के भीतर किराएदार का परिवार मौजूद था। स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा बताया है।
प्रशासन को पहले ही दी गई थी चेतावनी
मकान मालिक जावेद अहमद पटेल ने इस जर्जर ढांचे को लेकर काफी पहले ही प्रशासन को आगाह कर दिया था। रिकॉर्ड के अनुसार, 4 जून 2026 को उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और नगरपालिका परिषद हरदा को लिखित आवेदन देकर मकान की खतरनाक स्थिति की जानकारी दी थी। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि मकान का एक हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है और शेष हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है।
इस आवेदन के बाद नगरपालिका ने 27 मई 2026 को एक नोटिस जारी किया था। इसमें मकान मालिक को सात दिन के भीतर स्वयं जर्जर हिस्सा गिराने का निर्देश दिया गया था। चेतावनी दी गई थी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 221 के तहत निकाय स्वयं कार्रवाई करेगा। हालांकि, नोटिस जारी करने के बाद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके चलते यह जर्जर इमारत आज ढह गई।
स्कूल की छुट्टी ने बचाई कई मासूमों की जान
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस रास्ते पर यह मकान स्थित है, वह आबकारी रोड से जुड़ा हुआ है। इस रास्ते से रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे गुजरते हैं। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी होने के कारण सड़क पर बच्चों की आवाजाही नहीं थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि यह घटना किसी कार्यदिवस पर होती, तो परिणाम भयावह हो सकते थे।
घटना के समय किराएदार आवेदा बी का परिवार मकान के भीतर ही था। दीवार गिरने का पूरा दृश्य पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। मकान का आधा हिस्सा अभी भी बिना किसी सहारे के लटका हुआ है, जिसके नीचे किराएदार का सामान रखा है। यह बचा हुआ हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जिससे आसपास के लोगों में डर का माहौल है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने नगरपालिका से मांग की है कि मकान के बचे हुए खतरनाक हिस्से को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित रूप से गिराया जाए। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अब भी सुस्ती बरती और कोई और हादसा हुआ, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। मकान मालिक द्वारा पहले ही आवेदन देने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और लोग प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। गौरतलब है कि हरदा में जर्जर मकानों का सर्वे और उन्हें समय रहते गिराने की प्रक्रिया अक्सर फाइलों में ही दबी रह जाती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद नगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!