ग्वालियर में साइबर ठगों का आतंक: 24 घंटे में तीन लोगों से 2 लाख की धोखाधड़ी
घंटे में साइबर फ्रॉड के तीन केस आए सामने।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

ग्वालियर में साइबर अपराधियों का जाल तेजी से फैल रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर शहर में ठगी के तीन बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें शातिर ठगों ने मोबाइल हैकिंग, संदिग्ध एपीके (APK) फाइल और फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए आम लोगों को अपना शिकार बनाया है। इन घटनाओं में पीड़ितों को कुल मिलाकर करीब 2 लाख रुपये का चूना लगा है। पुलिस और साइबर सेल ने पीड़ितों की शिकायत पर मामले दर्ज कर लिए हैं और जांच शुरू कर दी है।
मोबाइल हैक कर खाते से उड़ाए 66 हजार
पहला मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के न्यू गणेश विहार का है, जहां आदित्यपुरम निवासी 46 वर्षीय पवित्र सिंह के बैंक खातों से अचानक पैसे कटने लगे। पीड़ित के अनुसार, 27 जुलाई को उनके पंजाब नेशनल बैंक और यस बैंक खाते से बिना किसी ओटीपी साझा किए या संदिग्ध लिंक पर क्लिक किए 66 हजार रुपये निकाल लिए गए। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी राशि यूपीआई के माध्यम से ट्रांसफर की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ठगों ने पीड़ित का मोबाइल हैक कर लिया था।
दूसरे मामले में ग्वालियर थाना क्षेत्र के किलागेट निवासी 39 वर्षीय सिमरन नारवानी को निशाना बनाया गया। एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें कॉल कर इंटरनेशनल पेमेंट सुविधा बंद करने का झांसा दिया और व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी। फाइल डाउनलोड करते ही पीड़िता के क्रेडिट कार्ड से 1 लाख रुपये से अधिक की राशि तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन में निकाल ली गई। पीड़िता ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
फर्जी ऐप का लालच बना मुसीबत
तीसरी घटना में बुलबुलपुरा निवासी 33 वर्षीय बोटम सिंह यादव ठगी का शिकार हुए। उन्होंने इंस्टाग्राम पर मिले एक लिंक के जरिए 'Tube' नामक ऐप डाउनलोड किया था, जिसे फिल्म देखने के लिए प्रमोट किया गया था। ऐप इंस्टॉल होते ही उनका मोबाइल हैंग होने लगा और ऑटो-अपडेट मोड में चला गया। जब मोबाइल सामान्य हुआ, तो उनके खाते से 30 हजार रुपये गायब हो चुके थे। इस मामले में भी किसी प्रकार का ओटीपी या अलर्ट नहीं मिला, जो साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। अब वे केवल ओटीपी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिमोट एक्सेस और मैलवेयर युक्त फाइलों का उपयोग कर रहे हैं। इन मामलों में पीड़ितों को बिना किसी चेतावनी के आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल लेनदेन के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
साइबर विशेषज्ञों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान स्रोत से आने वाली एपीके फाइल को इंस्टॉल न करें। बैंक कभी भी फोन पर किसी ऐप को डाउनलोड करने या निजी जानकारी साझा करने का दबाव नहीं बनाते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने लिंक, जैसे फ्री मूवी या गेमिंग ऐप, अक्सर मैलवेयर से युक्त होते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर देनी चाहिए।
वर्तमान में पुलिस की साइबर सेल इन तीनों मामलों की बारीकी से जांच कर रही है। ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए यूपीआई आईडी और बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि गिरोह तक पहुंचा जा सके। शहर में लगातार बढ़ रही साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं ने नागरिकों के बीच चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते पुलिस अब जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!