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गुरुग्राम मैनेजर हत्याकांड: एक करोड़ के लेनदेन में रची गई खौफनाक साजिश, पूर्व सहकर्मी और उसके पार्टनर ने दिया अंजाम

गुरुग्राम में अडानी रियल एस्टेट कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मानचंदा हत्याकांड में खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि युवराज ने अपनी पूर्व कलीग आन्या वत्स से करीब एक करोड़ रुपए लेने थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

22 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
गुरुग्राम मैनेजर हत्याकांड: एक करोड़ के लेनदेन में रची गई खौफनाक साजिश, पूर्व सहकर्मी और उसके पार्टनर ने दिया अंजाम
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गुरुग्राम में अडानी रियल एस्टेट कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मानचंदा की हत्या के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस वारदात के पीछे मुख्य वजह करीब एक करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन था। युवराज को अपनी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से यह बड़ी रकम वसूलनी थी, जिसे लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते आन्या और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा ने युवराज को मौत के घाट उतारने की साजिश रची।

फ्लैट पर रची गई हत्या की साजिश

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सेक्टर-70 स्थित एक फ्लैट में युवराज को बुलाकर हत्या की योजना बनाई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने तीन महीने पहले ही अवैध हथियार (कट्‌टा) खरीद लिया था। पुलिस ने जब गुरुग्राम में घटनास्थल का दोबारा मुआयना (सीन री-क्रिएशन) कराया, तो आरोपियों ने विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने युवराज को गोली मारी, हथियार को ठिकाने लगाया और शव को नाले में फेंक दिया। इस पूरी प्रक्रिया की दिल्ली पुलिस द्वारा वीडियोग्राफी भी की गई है।

युवराज मानचंदा 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ खरीदारी के लिए निकले थे, जिसके बाद उन्होंने गुरुग्राम में मीटिंग का हवाला देकर परिवार से विदा ली थी। इसके बाद से उनका मोबाइल बंद हो गया और वे घर नहीं लौटे। पांच दिनों तक कोई सुराग न मिलने पर परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को आन्या वत्स के साथ युवराज की बातचीत के संकेत मिले, जिसके बाद तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपियों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की लापरवाही और प्रशासनिक चूक

इस मामले में गुरुग्राम पुलिस की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है, जिसके चलते जांच प्रक्रिया काफी उलझ गई। युवराज का शव 10 सितंबर को बरामद हुआ था, लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने इसकी जानकारी अंतर-राज्यीय पुलिस पोर्टल पर 16 सितंबर को अपडेट की। इतना ही नहीं, डेटा एंट्री में भी भारी गड़बड़ी करते हुए इसे 'अज्ञात शव' के बजाय 'अज्ञात व्यक्ति' की श्रेणी में डाल दिया गया। इस चूक के कारण दिल्ली पुलिस और गुरुग्राम पुलिस के रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो सका।

प्रशासनिक स्तर पर एक और गंभीर चूक यह हुई कि पुलिस ने शव मिलने के 72 घंटे बाद ही 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पोर्टल पर जानकारी देर से अपडेट होने के कारण परिवार को समय रहते सूचना नहीं मिल पाई और वे युवराज के अंतिम दर्शन से वंचित रह गए। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी सुहेल खान को निलंबित कर दिया गया है।

न्यायालय का हस्तक्षेप और आगे की कार्रवाई

युवराज की बहन करिश्मा ने साकेत कोर्ट में याचिका दायर कर मामले से जुड़े सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की थी। कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए और उसे अदालत में पेश किया जाए। इसके बाद इन दस्तावेजों को दिल्ली पुलिस को सौंपने का आदेश दिया गया है, जो अब इस हत्याकांड की मुख्य जांच कर रही है।

वर्तमान में दिल्ली की लाजपत नगर थाना पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस उन सभी रास्तों और स्थानों की जांच कर रही है, जहां वारदात के बाद वे गए थे। पुलिस का मुख्य उद्देश्य अब इस हत्याकांड से जुड़े हर सबूत को पुख्ता करना है ताकि कोर्ट में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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