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पेपर लीक पर नकेल कसने की तैयारी: संसद में पेश होगा सख्त संशोधन बिल, 10 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान

केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन करने जा रही है। पीएम नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद सरकार सोमवार को लोकसभा में नया बिल पेश कर सकती है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

26 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
पेपर लीक पर नकेल कसने की तैयारी: संसद में पेश होगा सख्त संशोधन बिल, 10 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान
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पेपर लीक रोकने के लिए सरकार लाएगी नया संशोधन विधेयक

केंद्र सरकार देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में व्यापक संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सोमवार को लोकसभा में नया संशोधन बिल पेश कर सकते हैं। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।

जांच के लिए समय सीमा और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

नए बिल में दो महत्वपूर्ण धाराएं 12ए और 12बी को शामिल किया गया है, जो जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएंगी। इसके तहत केंद्र सरकार एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करने के लिए अधिकृत होगी। किसी भी मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी या एसआईटी को सौंपे जाने के बाद, जांच को अधिकतम दो महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाएगी। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से इन विशेष अदालतों को नामित करेंगे, जहां चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा।

कानूनी प्रक्रिया को और अधिक चुस्त बनाने के लिए अपील के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी, जिसकी सुनवाई दो जजों की बेंच करेगी। ऐसी अपीलों को तीन महीने के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। अपील के लिए 30 दिनों की समय सीमा तय की गई है, जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री का संकल्प और परीक्षाओं की सुरक्षा

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संदेश के माध्यम से स्पष्ट किया था कि पेपर लीक का मुद्दा लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा है। छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो, इसके लिए सरकार ने कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा आयोजित कर परिणाम भी जारी कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल इतने से संतोष नहीं किया जाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी ढांचे को और अधिक मजबूत किया जाएगा।

यह पूरा घटनाक्रम मुख्य रूप से 3 मई को हुए नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बाद तेज हुआ है। सरकार का प्रयास है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की खामी न रहे और दोषियों को कठोरतम दंड मिले।

मौजूदा कानून और प्रस्तावित बदलावों का प्रभाव

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 देश का पहला केंद्रीय एंटी-पेपर लीक कानून है, जो 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू है। वर्तमान कानून में पेपर लीक करने वालों के लिए 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। यदि कोई गिरोह इसमें शामिल पाया जाता है, तो सजा 5 से 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने तक बढ़ सकती है।

प्रस्तावित संशोधनों के बाद सजा के प्रावधान और अधिक सख्त होने की उम्मीद है। इसके अलावा, परीक्षा कराने वाली एजेंसी यदि दोषी पाई जाती है, तो उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने, परीक्षा की पूरी लागत वसूलने और अगले चार वर्षों तक किसी भी परीक्षा के आयोजन पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े दंड शामिल हैं। इस कानून के तहत दर्ज मामले गैर-जमानती होते हैं और इनकी जांच डीएसपी या उससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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