गोरखपुर: 1000 शीशों से तैयार हुई 13 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा, कारीगरी देख दंग रह गए लोग
गोरखपुर में स्थापित होने जा रही 13 फीट की गणेश प्रतिमा इन दिनों पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से चमचमाते शीशों से तैयार किया जा रहा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इस साल गणेशोत्सव के दौरान एक बेहद अनूठी प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शहर में स्थापित होने जा रही 13 फीट ऊंची भगवान गणेश की यह मूर्ति पूरी तरह से कांच के टुकड़ों से तैयार की गई है। इस भव्य प्रतिमा को देखने के लिए अभी से ही श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
15 दिनों की कड़ी मेहनत और बारीकी
इस कलाकृति को पश्चिम बंगाल के वर्धमान से आए कुशल कलाकारों ने आकार दिया है। मूर्ति को तैयार करने में लगभग 1000 से अधिक शीशे के टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। कलाकारों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में 15 दिनों से अधिक का समय लगा है। शीशे के छोटे-छोटे टुकड़ों को तराशकर उन्हें मूर्ति के ढांचे पर चिपकाना एक अत्यंत धैर्य और बारीकी वाला काम था।
कलाकार अमल कुमार रॉय के अनुसार, शीशों को मजबूती से चिपकाने के लिए एक विशेष पारंपरिक मिश्रण का उपयोग किया गया है। इसमें फेविकोल और मैदा के आटे का इस्तेमाल किया गया है, जिससे शीशे अपनी जगह पर मजबूती से टिके रहते हैं और उनके गिरने या निकलने का डर नहीं रहता। यह तकनीक मूर्ति को एक अलग ही चमक और भव्यता प्रदान कर रही है।
किराना मंडी में सजेगा भव्य पांडाल
यह प्रतिमा शहर के साहबगंज किराना मंडी में स्थापित की जाएगी। वर्तमान में मूर्ति का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोरखनाथ मंदिर परिसर में चल रहे इस निर्माण कार्य को देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं। कलाकारों का दावा है कि जब यह मूर्ति पूरी तरह से सजकर पांडाल में विराजेगी, तो यह इस साल के गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण साबित होगी।
बंगाल की कला शैली का यह अद्भुत नमूना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह कारीगरों की रचनात्मकता का भी बेहतरीन उदाहरण है। इससे पहले बंगाल में भी इसी तरह की कांच वाली गणेश प्रतिमा बनाई गई थी, जिसे काफी सराहना मिली थी। अब गोरखपुर के भक्त भी इसी तरह की भव्यता के साक्षी बनने के लिए उत्साहित हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल
गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर शहर में तैयारियां जोरों पर हैं। शीशे से बनी यह 13 फीट की प्रतिमा न केवल रात की रोशनी में जगमगाएगी, बल्कि दिन के उजाले में भी अपनी चमक से भक्तों का मन मोह लेगी। स्थानीय आयोजकों का मानना है कि इस बार गणेशोत्सव के दौरान यह प्रतिमा शहर में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगी।
फिलहाल, कलाकार मूर्ति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जैसे-जैसे उत्सव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पांडाल की सजावट और मूर्ति की भव्यता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह अनोखी पहल न केवल पारंपरिक मूर्तिकला को नया आयाम दे रही है, बल्कि आधुनिक और पारंपरिक कला के मेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश कर रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!