गोंडा: घाघरा का जलस्तर घटा, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में अब भी बरकरार है संकट
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर बुधवार को तेजी से घटा, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। सुबह 9 बजे नदी खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

घाघरा के जलस्तर में गिरावट, पर मुसीबतें कम नहीं
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी के जलस्तर में बुधवार को राहत भरी गिरावट दर्ज की गई है। सुबह 9 बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। हालांकि, नदी के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य होने में अभी लंबा समय लगेगा। नवाबगंज क्षेत्र के ब्योन्दा माझा, बाणी माझा और दत्तनगर जैसे कई गांवों के मुख्य मार्ग अभी भी जलमग्न हैं, जिससे ग्रामीणों का संपर्क मुख्य शहर से कटा हुआ है।
ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस दौरान सुरक्षा के मानकों की अनदेखी भी देखी जा रही है, जहां नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा है, जिससे किसी भी अनहोनी की आशंका बनी हुई है। स्कूली बच्चे भी घुटनों तक भरे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम है।
कटान से बढ़ा खतरा, 10 परिवारों ने छोड़े घर
जलस्तर घटने के साथ ही घाघरा नदी के तटीय इलाकों में कटान की समस्या विकराल हो गई है। पिछले 48 घंटों में नदी की तेज धारा ने खेतों और रिहायशी इलाकों की जमीन को काटना शुरू कर दिया है। इस कटाव के कारण अब तक 10 से अधिक परिवारों को अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कटान से हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि उनकी उपजाऊ भूमि और फसलें नदी में विलीन हो रही हैं।
बुधवार को गिरजा, शारदा और सरयू बैराज से कुल 2,19,354 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। इसमें गिरजा बैराज से 1,31,478 क्यूसेक, शारदा बैराज से 84,285 क्यूसेक और सरयू बैराज से 3,541 क्यूसेक पानी शामिल है। इस अतिरिक्त पानी के बहाव ने निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
प्रशासनिक राहत और एंबुलेंस की तैनाती
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जिले के करीब चार गांवों की तीन हजार आबादी अभी भी बाढ़ की मार झेल रही है। प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और लंच पैकेट पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में तैनात हैं, ताकि किसी भी प्रकार की जलजनित बीमारी को फैलने से रोका जा सके। पशु चिकित्सा विभाग भी सक्रिय है और प्रभावित पशुपालकों को पशुओं के चारे के लिए भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पास चिन्हित हॉटस्पॉट पर एंबुलेंस तैनात की गई हैं, ताकि बीमार या घायल व्यक्तियों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, सरकारी नावों का संचालन भी सुनिश्चित किया गया है ताकि आवागमन में लोगों को अधिक कठिनाई न हो। प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और राहत कार्यों की निरंतर निगरानी की जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!