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राजनीति और युद्ध एक ही सिक्के के दो पहलू: पूर्व CDS अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक अहमियत पर की चर्चा

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छा का सीधा विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे ऊपर होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा करने वाले कई माध्यमों में से एक हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

25 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
राजनीति और युद्ध एक ही सिक्के के दो पहलू: पूर्व CDS अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक अहमियत पर की चर्चा
मूल स्रोत

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीतियों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि सैन्य शक्ति वास्तव में किसी देश की राजनीतिक इच्छाशक्ति का ही विस्तार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए उसके राजनीतिक हित सर्वोपरि होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा करने वाले प्रमुख साधनों में से एक हैं।

युद्ध और राजनीति का अटूट संबंध

जनरल चौहान ने अपने संबोधन में प्रूशियाई सैन्य रणनीतिकार कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के सिद्धांतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीति और युद्ध को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। क्लॉजविट्ज के अनुसार, युद्ध वास्तव में राजनीति को दूसरे माध्यमों से आगे बढ़ाने की एक प्रक्रिया है। यह विचार आधुनिक सैन्य सिद्धांतों की नींव माना जाता है, जो यह स्पष्ट करता है कि सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य हमेशा राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ा होता है।

लोकतांत्रिक ढांचे में सरकार की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बल प्रयोग का निर्णय लेती है, तो सेना की जिम्मेदारी दोहरी हो जाती है। पहली जिम्मेदारी सरकार को प्रभावी सैन्य विकल्प प्रदान करना है, ताकि वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। दूसरी जिम्मेदारी सरकार के भीतर यह विश्वास पैदा करना है कि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन कर सकें।

ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य विकल्पों की तैयारी

पूर्व CDS ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान अपने हमलों के प्रभाव का कोई ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देश ने चीनी कंपनियों की मदद से कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी जुटाने की कोशिश की, लेकिन वे यह साबित नहीं कर सके कि उनके हमलों से कोई भी निर्धारित लक्ष्य हिट हुआ था। यह घटनाक्रम आधुनिक युद्ध में सूचना और साक्ष्यों की भूमिका को रेखांकित करता है।

सैन्य विकल्पों की गुणवत्ता पर बात करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि ये विकल्प अचानक तैयार नहीं होते। इसके लिए शांतिकाल में निरंतर तैयारी, गहन प्रशिक्षण और युद्धाभ्यास की आवश्यकता होती है। हर सैन्य विकल्प के साथ कुछ जोखिम जुड़े होते हैं, और सैन्य नेतृत्व का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि ये विकल्प न केवल राजनीतिक जरूरतों को पूरा करें, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मानकों पर भी खरे उतरें।

रणनीतिक प्रभाव और भविष्य की सीख

ऑपरेशन सिंदूर को संपन्न हुए लगभग 15 महीने बीत चुके हैं, लेकिन जनरल चौहान के अनुसार इसका रणनीतिक महत्व आज भी बरकरार है। भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ इस ऑपरेशन के परिणामों और इसके प्रभाव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों का आकलन केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

अंत में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन से मिली सीख, सामने आई कमियों को दूर करने के लिए किए गए प्रयास और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को समझना अत्यंत आवश्यक है। दुनिया में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार आधुनिक बनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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