कानपुर में ओवैसी का शक्ति प्रदर्शन: कब्रिस्तान की बुलडोजर कार्रवाई पर सरकार को घेरा, चुनावी बिगुल फूंका
कब्रिस्तान मुद्दे पर सरकार को घेराओवैसी ने बर्रा के कब्रिस्तान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां लोगों के माता-पिता और परिजनों की कब्रें थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

कानपुर में ओवैसी का आक्रामक रुख
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कानपुर के बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर तीखे हमले किए। करीब 55 मिनट के अपने संबोधन में ओवैसी ने स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी की रणनीति स्पष्ट कर दी। उन्होंने विशेष रूप से बर्रा क्षेत्र में हुई कब्रिस्तान की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि बर्रा स्थित कब्रिस्तान में कई लोगों के पूर्वजों की कब्रें थीं, जिन्हें प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर ध्वस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी निर्माण को हटाने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसमें नोटिस देना, जवाब मांगना और सुनवाई का अवसर देना शामिल है, लेकिन इस मामले में इन सभी प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा करार दिया।
विकास कार्यों और अधूरे वादों पर सवाल
कब्रिस्तान के मुद्दे के अलावा, ओवैसी ने कानपुर के स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने रिजवान उल्लाह अस्पताल में 100 बेड की सुविधा उपलब्ध कराने के पुराने वादों की याद दिलाई। ओवैसी ने कहा कि जनता को उन वादों का हिसाब मांगना चाहिए जो चुनाव के दौरान किए गए थे लेकिन आज तक धरातल पर नहीं उतरे। उन्होंने बाबूपुरवा और बेगमपुरवा क्षेत्र में सरकारी इंटर कॉलेज की स्थापना की मांग को भी दोहराया।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि सरकार न केवल जीवित लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है, बल्कि कब्रों में सो रहे बुजुर्गों को भी निशाना बना रही है। उन्होंने स्थानीय निवासियों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और विकास के नाम पर किए गए दावों की हकीकत को समझें। ओवैसी का यह संबोधन स्थानीय जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी तैयारियों का आगाज
आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी कानपुर की कैंट सीट सहित जिले की अन्य सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को मुख्यधारा की राजनीति में लाएगी। ओवैसी ने यह भी संकेत दिया कि चुनाव प्रचार के दौरान वह कानपुर का दोबारा दौरा करेंगे ताकि कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह दौरा कानपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी के जनाधार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कब्रिस्तान और बुनियादी सुविधाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर उन्होंने सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और सत्ताधारी दल को चुनौती दी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में कानपुर की राजनीति में इन मुद्दों का क्या असर पड़ता है और अन्य दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
सभा के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि ओवैसी कानपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जनता के बीच जाएं और सरकार की विफलताओं को उजागर करें। ओवैसी का यह दौरा न केवल एक जनसभा थी, बल्कि आगामी चुनावों के लिए एक स्पष्ट चुनावी बिगुल भी माना जा रहा है।
कानपुर के राजनीतिक गलियारों में ओवैसी के इस दौरे की चर्चा तेज है। स्थानीय स्तर पर कब्रिस्तान की कार्रवाई का मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ था, जिसे ओवैसी ने अपने भाषण के जरिए और अधिक धार दे दी है। आने वाले दिनों में कानपुर की राजनीति में इन मुद्दों को लेकर और अधिक हलचल देखने को मिल सकती है, क्योंकि सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!