जयपुर: एसएमएस अस्पताल के आईपीडी टावर की 24वीं मंजिल पर तैयार हुआ हेलीपैड, एयर एंबुलेंस से मिलेगी बड़ी राहत
मरीज को लेकर 24वीं मंजिल पर लैंड होगी एयर एंबुलेंस। आईपीडी टावर का हेलीपैड लगभग तैयार, सबसे ज्यादा राहत ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीजों को।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन आईपीडी टावर की 24वीं मंजिल पर हेलीपैड का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस सुविधा के शुरू होने से गंभीर मरीजों, विशेषकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आने वाले लोगों को एयर एंबुलेंस के जरिए सीधे अस्पताल की छत पर उतारना संभव हो सकेगा।
अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का रखा गया ध्यान
इस हेलीपैड को करीब 59.87 मीटर की लंबाई और 38 मीटर की चौड़ाई में तैयार किया गया है। इसके निर्माण में एम-30 आरसीसी तकनीक का उपयोग किया गया है, जो हेलिकॉप्टर के उतरने और उड़ान भरने के दौरान होने वाले भारी दबाव और कंपन को सहने में सक्षम है। हेलीपैड के डिजाइन को पहले ही डीजीसीए (DGCA) से मंजूरी मिल चुकी है और आईआईटी दिल्ली द्वारा इसकी सुरक्षा जांच (प्रूफ चेक) भी की जा चुकी है।
सुरक्षा के लिहाज से यहां कई महत्वपूर्ण इंतजाम किए जा रहे हैं। हेलीपैड के ठीक नीचे 23वीं मंजिल पर 7 से 10 हजार लीटर क्षमता का डेडिकेटेड वाटर टैंक बनाया जाएगा, जो एविएशन फायर प्रोटेक्शन सिस्टम से जुड़ा होगा। इसके अलावा, पायलट की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक विंड डायरेक्शन सिस्टम, एयर बैंड ट्रांसमिशन और खराब मौसम में भी लैंडिंग को सुगम बनाने के लिए डे-लाइट और एविएशन लैंप लगाए जा रहे हैं।
मरीजों को मिलेगी त्वरित चिकित्सा सुविधा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार, इस टावर में विश्व स्तरीय आईसीयू और बेड साइड डायग्नोसिस सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि मरीज के अस्पताल पहुंचते ही 60 मिनट के भीतर सभी आवश्यक जांचें पूरी की जा सकें। हेलीपैड से मरीज को रैंप के जरिए 23वीं मंजिल तक लाया जाएगा, जहां से लिफ्ट के माध्यम से उन्हें सीधे ओटी या आईसीयू में शिफ्ट किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर एंबुलेंस सुविधा से अंग प्रत्यारोपण के मामलों में समय की भारी बचत होगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से मरीज को अस्पताल लाने में लगने वाला समय कई बार जानलेवा साबित होता है, जिसे अब हवाई मार्ग से कम किया जा सकेगा। दिसंबर 2027 तक इस पूरे टावर के निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
संचालन और भविष्य की चुनौतियां
हेलीपैड का काम पूरा होने के बाद एविएशन अप्रूवल की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए राज्य के सिविल एविएशन विभाग को नोडल एजेंसी बनाए जाने की संभावना है। टावर के संचालन के बाद इसके रखरखाव पर हर महीने करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसे देखते हुए प्रशासन फाइनेंशियल वायबिलिटी मॉडल पर भी विचार कर रहा है, ताकि सुविधाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
भविष्य में एयर एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसी निजी कंपनी के साथ करार करने पर भी विचार किया जा सकता है। यह हेलीपैड न केवल जयपुर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र के रूप में एसएमएस अस्पताल की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!