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अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, राजघाट पहुंचकर बापू को दी श्रद्धांजलि

पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के आंदोलनकारी सोनम वांगचुक को आज, 27 जुलाई 2026 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने की पूरी संभावना है। मेदांता सूत्रों के मुताबिक, वांगचुक के स्वास्थ्य में अब काफी तेजी से सुधार हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

27 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, राजघाट पहुंचकर बापू को दी श्रद्धांजलि
मूल स्रोत

मेदांता अस्पताल से मिली छुट्टी

पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख के आंदोलनकारी सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। स्वास्थ्य में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। अस्पताल से निकलने के तुरंत बाद वांगचुक अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

वांगचुक पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती थे। मेदांता के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनकी रिपोर्ट सामान्य हैं और वह अब चलने-फिरने में पूरी तरह सक्षम हैं। अस्पताल से निकलने से पहले उन्होंने एक वीडियो संदेश में अपने समर्थकों और देशवासियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत

राजघाट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि बापू का दिखाया मार्ग आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, जो उनकी सफलता का मुख्य कारण बना। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यदि वे हिंसा का सहारा लेते, तो स्थिति बिगड़ सकती थी, इसलिए उन्होंने संयम बरतते हुए समय से पहले अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि गांधीवादी तरीके से किया गया विरोध सरकार से अधिक जनता के दिलों तक पहुंचता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे किसी भी समस्या के समाधान के लिए शांति और धैर्य का रास्ता अपनाएं, क्योंकि कठोर से कठोर हृदय को भी अहिंसा के माध्यम से पिघलाया जा सकता है।

आंदोलन और भविष्य की राह

सोनम वांगचुक हाल ही में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर 26 दिनों के अनशन पर थे। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें पहले सफदरजंग और बाद में मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन वापस लिया था।

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था और शासन प्रणाली में सुधार की दिशा में एक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के हितों और जनहित के मुद्दों पर वे भविष्य में भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे। राजघाट से लौटने के बाद अब वे अपने गृह राज्य लद्दाख के लिए रवाना होंगे।

लगातार सक्रिय रहे हैं वांगचुक

यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ने जनहित के लिए लंबा संघर्ष किया है। इससे पूर्व मार्च 2024 में उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद भी वे विभिन्न माध्यमों से लद्दाख के पर्यावरण और वहां के युवाओं के अधिकारों के लिए सक्रिय रहे हैं।

अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को स्वास्थ्य अपडेट और आंदोलन की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चार वीडियो जारी कर अपनी स्थिति और सरकार के साथ हुई बातचीत के बारे में विस्तार से बताया था। अब पूर्ण स्वस्थ होकर वे अपने अगले कार्यक्रमों की ओर बढ़ रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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