टोल प्लाजा घोटाला: पूर्व विधायक संजय शर्मा की कंपनियों पर ईडी का शिकंजा, 100 नाकों पर अवैध वसूली का खुलासा
ईडी की टीम ने एमपी के पूर्व विधायक संजय शर्मा की टोल कम्पनी समेत अन्य राज्यों में 2 सितम्बर को एक साथ छापेमारी की थी। इसी में यह खुलासे हुए हैं। ईडी ने प्रेस को जारी बयान में कहा है कि आरोपियों से ज़ब्त किए गए डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच से पता चला कि इस सिस्टम का इस्तेमाल लगभग 100 टोल प्लाज़ा पर किया गया था और डिजिटल रिकॉर्ड से करोड़ों रुपये की गैर-कानूनी टोल रसीदें मिली हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

देशव्यापी टोल प्लाजा घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टोल प्लाजा पर बड़े पैमाने पर की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक संजय शर्मा की टोल कंपनी समेत देश के कई राज्यों में छापेमारी की गई है। जांच एजेंसी ने पाया है कि टोल नाकों पर सरकारी नियमों को दरकिनार कर अनधिकृत मोबाइल ऐप्स के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही थी। यह पूरा नेटवर्क देश के 14 राज्यों में फैला हुआ है, जिसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं।
ईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर सहित कुल 14 स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें मिर्जापुर के अट्रैला टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी की शिकायत मिली थी। जांच में सामने आया है कि FASTag का बैलेंस कम होने या न होने की स्थिति में गाड़ियों से अवैध तरीके से टोल वसूला जा रहा था।
अवैध ऐप्स और पोर्टल का इस्तेमाल
जांच के दौरान ईडी को 'Mobdata' और 'Any' जैसे बिना मंजूरी वाले ऐप्स का पता चला है। इन ऐप्स का इस्तेमाल उन गाड़ियों से टोल वसूलने के लिए किया जाता था जो FASTag सिस्टम के दायरे में नहीं आती थीं। ये ऐप्स नकली रसीदें तैयार करते थे, जिससे एनएचएआई (NHAI) के आधिकारिक सिस्टम को चकमा दिया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए टोल की कानूनी रिपोर्टिंग को छिपाया जाता था, जिससे सरकारी खजाने को भारी राजस्व का नुकसान हुआ है।
डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि इस अवैध सिस्टम का जाल करीब 100 टोल प्लाजा तक फैला हुआ था। ईडी ने बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की अवैध टोल रसीदें मिली हैं। इसके अलावा, इस पूरी वसूली प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए विशेष पोर्टल भी चलाए जा रहे थे, जो सीधे तौर पर बिचौलियों और टोल कंपनियों की मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं।
नकद बरामदगी और राजनीतिक कनेक्शन की जांच
छापेमारी के दौरान ईडी ने देशभर से 1.03 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की है। इसके अतिरिक्त, आठ बैंक लॉकरों को फ्रीज कर दिया गया है और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। मध्य प्रदेश में पूर्व विधायक संजय शर्मा के तेंदूखेड़ा और देवरी स्थित कार्यालयों के साथ-साथ उनके सहयोगियों के ठिकानों पर भी दबिश दी गई। एक शराब कारोबारी के ठिकाने से भी 25 लाख रुपये नकद मिलने की सूचना है।
ईडी की जांच अब उन प्रभावशाली लोगों और मंत्रियों तक पहुंच गई है, जिनके नाम इस घोटाले में सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसी उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जो टोल कंपनियों, बिचौलियों और राजनीतिक संरक्षण के बीच के संबंधों को उजागर करती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि ईडी जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
पीएमएलए (PMLA) के प्रावधानों के तहत शुरू की गई यह जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। ईडी उन सभी टोल प्लाजा की सूची तैयार कर रही है जहां इन अवैध ऐप्स का उपयोग किया गया था। एनएचएआई के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि कैसे इन निजी कंपनियों ने सरकारी सिस्टम में सेंधमारी की। फिलहाल, जब्त किए गए दस्तावेजों और बैंक खातों की गहन पड़ताल जारी है ताकि इस संगठित अपराध के मुख्य सूत्रधारों तक पहुंचा जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!