दुधवा नेशनल पार्क में बाढ़ का कहर: हाथियों और नाव के सहारे वनकर्मियों की कड़ी निगरानी
सुहेली नदी की बाढ़ का पानी दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों तक पहुंच गया है। जंगली जानवर जान बचाकर जंगल से बाहर भाग रहे हैं।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा नेशनल पार्क इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है। भारत-नेपाल सीमा से होकर गुजरने वाली नदियों के उफान पर होने के कारण सुहेली नदी का पानी जंगल के भीतर तक प्रवेश कर गया है। इस जलभराव ने न केवल पार्क के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किया है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
जंगल में तीन से चार फीट तक भरा पानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ का पानी जंगल के निचले इलाकों में तीन से चार फीट तक भर गया है। पानी के बढ़ते स्तर के कारण जंगली जानवर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं। इस स्थिति ने वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि जानवरों के रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है।
वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ के कारण सामान्य रास्तों पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है, जिसके चलते वनकर्मियों को गश्त करने के लिए विशेष साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हाथियों और नाव से हो रही पेट्रोलिंग
जंगल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वनकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। जिन इलाकों में पानी का स्तर अधिक है, वहां वनकर्मी नावों के जरिए गश्त कर रहे हैं। वहीं, घने जंगलों और दलदली इलाकों में हाथियों की मदद ली जा रही है, ताकि वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और उन्हें किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।
कई संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मी हथियारों के साथ कमर तक पानी में उतरकर निगरानी कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाढ़ के दौरान कोई भी वन्यजीव शिकारियों का शिकार न बने और न ही वे भटककर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचें।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अपनी टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। वन विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। बाढ़ के कारण जानवरों के व्यवहार में आए बदलावों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने आसपास के गांवों के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे जंगल के किनारे न जाएं और यदि उन्हें कोई जंगली जानवर दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
आने वाले दिनों में यदि बारिश का दौर जारी रहता है, तो बाढ़ की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, वन विभाग की प्राथमिकता वन्यजीवों को सुरक्षित रखने और जंगल की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!