धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के खिलाफ 12वें दिन भी जारी रहा ग्रामीणों का प्रदर्शन, 30 से अधिक गांवों का मिला साथ
धौलपुर के सरमथुरा थाना क्षेत्र में बसंतपुरा मोड़ स्थित खरेर नदी के पास टाइगर रिजर्व के विरोध में ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन रविवार को 12वें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन को कच्छपुरा, कांकरेट, दुर्गुसी, रहरई, बटीकरा, खेमरी सहित 30 से अधिक गांवों का समर्थन मिला है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

टाइगर रिजर्व के विरोध में ग्रामीणों का लंबा संघर्ष
राजस्थान के धौलपुर जिले में सरमथुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसंतपुरा मोड़ पर स्थित खरेर नदी के पास ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 12वें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (डीकेटीआर) के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपनी आजीविका और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
इस आंदोलन को अब आसपास के 30 से अधिक गांवों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। इनमें कच्छपुरा, कांकरेट, दुर्गुसी, रहरई, बटीकरा और खेमरी जैसे गांव प्रमुख रूप से शामिल हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि टाइगर रिजर्व को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी असंतोष व्याप्त है।
रोजगार और आजीविका पर मंडरा रहा संकट
प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह है कि टाइगर रिजर्व के गठन से इस क्षेत्र में खेती, पशुपालन और स्थानीय व्यवसायों पर बुरा असर पड़ेगा। ग्रामीणों को डर है कि इस परियोजना के लागू होने से न केवल उनका रोजगार छिन जाएगा, बल्कि उन्हें अपने पुश्तैनी घरों से पलायन करने पर भी मजबूर होना पड़ सकता है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे ऐसी किसी भी योजना को स्वीकार नहीं करेंगे जो उनके अस्तित्व और आजीविका के साधनों को नष्ट कर दे।
आंदोलन समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका विरोध पूर्णतः शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से जारी रहेगा। ग्रामीणों ने किसी भी प्रकार की हिंसा या अशांति फैलाने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे अपनी बात को लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के सामने रखेंगे।
करौली तक फैलेगा आंदोलन का दायरा
आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब करौली जिले के प्रभावित गांवों को भी इससे जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। समिति के अनुसार, धौलपुर और करौली जिलों के कुल 108 गांवों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में पंच-पटेलों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच लगातार चर्चाएं हो रही हैं, ताकि एक बड़ी महापंचायत का आयोजन किया जा सके और सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
आगामी चुनावों को लेकर भी धरना स्थल पर चर्चाओं का दौर जारी है। ग्रामीणों ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती है, तो वे चुनाव बहिष्कार जैसे कठोर कदम उठाने पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय सभी गांवों के प्रतिनिधियों की सामूहिक बैठक में ही लिया जाएगा।
25 अगस्त के कार्यक्रम पर टिकी सबकी नजरें
आने वाले दिनों में इस आंदोलन के और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं। विशेष रूप से 25 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। आंदोलन समिति का दावा है कि इस दिन धौलपुर और करौली के 108 गांवों के लोग बड़ी संख्या में जुट सकते हैं। यह आयोजन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि ग्रामीण अब अपनी मांगों को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!