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धार का स्टेट हाईवे-35 बना मौत का जाल: एक महीने में 15 हादसों से सहमे लोग

धार जिले का स्टेट हाईवे-35 (सरदारपुर–बदनावर) हादसों का हॉटस्पॉट बन गया है। गुजरात से राजस्थान को जोड़ने वाले इस 45 किलोमीटर लंबे मार्ग पर पिछले एक वर्ष में भारी वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ा है, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
धार का स्टेट हाईवे-35 बना मौत का जाल: एक महीने में 15 हादसों से सहमे लोग
मूल स्रोत

धार जिले से गुजरने वाला स्टेट हाईवे-35 इन दिनों हादसों का केंद्र बन गया है। सरदारपुर से बदनावर को जोड़ने वाला यह 45 किलोमीटर लंबा मार्ग गुजरात और राजस्थान को आपस में जोड़ता है, जिसके कारण यहां भारी वाहनों का आवागमन लगातार बना रहता है। पिछले एक साल में इस सड़क पर वाहनों का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है, जिसका सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ रहा है।

हाट बाजार और अतिक्रमण से बढ़ रहा खतरा

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, जोलाना में प्रत्येक शुक्रवार को सड़क किनारे लगने वाला हाट बाजार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। बाजार के दिन सड़क पर पैदल चलने वालों की भारी भीड़ और तेज रफ्तार वाहनों का एक साथ होना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इसके अलावा, लाबरिया चौपाटी और राजोद जैसे क्षेत्रों में सड़क के किनारे हुए अतिक्रमण ने मार्ग को और भी संकरा बना दिया है।

सड़क किनारे बनी दुकानों के कारण वाहनों को गुजरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन अक्सर अनियंत्रित होकर हादसों का कारण बनते हैं।

एक महीने में 15 दुर्घटनाएं, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महज एक महीने के भीतर इस हाईवे पर 12 से 15 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों में अब तक दो से तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 10 से 15 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने क्षेत्र के निवासियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

आम जनता ने अब जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। प्रशासन से मुख्य रूप से सड़क किनारे लगने वाले बाजारों के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करने और अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग की गई है।

यातायात नियंत्रण और भविष्य की चुनौतियां

स्थानीय निवासियों की मांगों में भारी वाहनों की गति पर प्रभावी नियंत्रण और नियमित ट्रैफिक निगरानी शामिल है। हाईवे पर पुलिस की गश्त बढ़ाने और साइन बोर्ड लगाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है ताकि चालकों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया जा सके। सड़क का संकरा होना और भारी वाहनों का दबाव भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है कि कैसे इस महत्वपूर्ण मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए। व्यापारिक गतिविधियों और यातायात के दबाव के बीच संतुलन बनाना जरूरी है ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। फिलहाल, स्थानीय लोग प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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