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दिल्ली में कचरे से बनेगी ऊर्जा: तेहखंड और ओखला में लगेंगे बायो-गैस प्लांट

दिल्ली सरकार ने कचरे से कंचन (Waste to Wealth) और प्रदूषण मुक्त राजधानी के अपने विज़न की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली नगर निगम और देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

30 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
दिल्ली में कचरे से बनेगी ऊर्जा: तेहखंड और ओखला में लगेंगे बायो-गैस प्लांट
मूल स्रोत

दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने और 'कचरे से कंचन' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शहर में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को आधुनिक बनाना और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

तेहखंड और ओखला में स्थापित होंगे संयंत्र

इस समझौते के तहत दिल्ली के तेहखंड और ओखला में अत्याधुनिक कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन दोनों संयंत्रों की कुल प्रसंस्करण क्षमता 800 टन प्रतिदिन (TPD) निर्धारित की गई है। इन संयंत्रों के माध्यम से शहर में उत्पन्न होने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा, जिससे लैंडफिल साइट्स पर कचरे का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि 800 टन प्रतिदिन की क्षमता वाले ये प्लांट दिल्ली के कचरा प्रबंधन मॉडल को पूरी तरह से बदल सकते हैं। गीले कचरे को सीधे ऊर्जा में परिवर्तित करने से न केवल कचरे के पहाड़ों के आकार को कम करने में तेजी आएगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प साबित होगा।

प्रदूषण पर लगाम और स्वच्छ ईंधन का विकल्प

इन बायो-गैस संयंत्रों के संचालन से उत्पन्न होने वाली कंप्रेस्ड बायो-गैस का उपयोग वाहनों और औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जाएगा। यह पहल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने में सहायक होगी। इसके अलावा, गीले कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से मीथेन गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी, जो वर्तमान में लैंडफिल साइटों के आसपास की हवा को प्रदूषित करने का एक बड़ा कारण बनी हुई है।

इस परियोजना के माध्यम से कचरे से होने वाली दुर्गंध को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी, जिससे स्थानीय निवासियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। यह कदम दिल्ली को एक हरित और स्वच्छ राजधानी बनाने के सरकार के दीर्घकालिक विजन का हिस्सा है।

सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि एमसीडी और ऑयल इंडिया का यह संयुक्त प्रयास सतत विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को कूड़े के ढेरों से पूरी तरह मुक्त करना है। इस परियोजना के जरिए न केवल कचरे का निपटान होगा, बल्कि उसे एक मूल्यवान संसाधन में बदलकर सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।

आने वाले समय में इन संयंत्रों के चालू होने से दिल्ली में कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदलने की संभावना है। यह न केवल कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण का एक उदाहरण बनेगा, बल्कि अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम करेगा। सरकार की प्राथमिकता अब इन संयंत्रों के निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की है ताकि जल्द से जल्द इसका लाभ राजधानी के नागरिकों को मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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