दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी पांच मंजिला इमारत, मलबे में दबने से 6 लोगों की मौत
दिल्ली में रविवार दोपहर 5 मंजिला इमारत गिर गई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई। 12 लोगों का रेस्क्यू किया गया है। 5 लोग गंभीर घायल हैं, जिन्हें एम्स में भर्ती किया गया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

सत्य निकेतन में बड़ा हादसा: बेसमेंट की खुदाई बनी काल
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इस घटना में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मलबे से 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि 5 गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया है। यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल्स में रहते हैं।
प्राथमिक जांच और स्थानीय लोगों के बयानों से पता चला है कि इमारत के बेसमेंट में पिछले सात दिनों से तोड़फोड़ और खुदाई का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि बेसमेंट पहले से ही कमजोर था और उसमें पानी भरा हुआ था। खुदाई के दौरान एक मुख्य पिलर खिसक गया, जिससे पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे के वक्त वहां काम कर रहे मजदूर और पीजी में रह रहे छात्र मलबे की चपेट में आ गए।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के आदेश
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि चार मंजिल से अधिक ऊंचाई वाली सभी अवैध इमारतों को तत्काल प्रभाव से सील किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। पुलिस ने इमारत के मालिक आनंद बंसल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
इमारत के बारे में जानकारी मिली है कि यह करीब 40 साल पुरानी थी और 1990 में इसका निर्माण हुआ था। हालांकि, एमसीडी के रिकॉर्ड में इसे खतरनाक इमारतों की श्रेणी में नहीं रखा गया था। घटना के बाद से ही बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन मलबे की सघनता और संकरी गलियों के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और सुरक्षा के सवाल
घटनास्थल पर स्निफर डॉग्स और विशेष कैमरों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है। रेस्क्यू टीमों का कहना है कि मलबे को हटाने के दौरान आसपास की अन्य इमारतों के गिरने का भी खतरा बना हुआ है, इसलिए एहतियात के तौर पर पड़ोसी बिल्डिंग को खाली करा लिया गया है और उसे पिलर लगाकर सहारा दिया जा रहा है। मलबे में दबे एक युवक का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह मदद की गुहार लगाता दिख रहा है।
सत्य निकेतन में इस हादसे के बाद छात्रों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने सिविक सेंटर स्थित एमसीडी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया है। गौरतलब है कि 6 सितंबर को ही एमसीडी ने इलाके की जर्जर इमारतों को गिराने का नोटिस जारी किया था।
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1,133 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें लगभग 98 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। सत्य निकेतन का यह हादसा एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण और पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल मलबे को हटाने का काम जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता दबे हुए लोगों को बाहर निकालने की है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!