दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर: तीन दिन बंद रहेंगे सरकारी दफ्तर और अदालतें, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
नई दिल्ली में BRICS समिट से पहले दिल्ली को पोस्टर और रोशनी वाली सजावट से सजाया गया है। BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

राजधानी में सुरक्षा और सजावट का दौर
नई दिल्ली में आगामी 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सम्मेलन का मुख्य स्थल 'भारत मंडपम' पूरी तरह सजकर तैयार है। राजधानी के प्रमुख मार्गों को रोशनी और पोस्टरों से सजाया गया है, जिससे शहर में एक भव्य वातावरण बना हुआ है। इस वर्ष का सम्मेलन 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' की थीम पर केंद्रित है।
सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। शहर के कई हिस्सों में अस्थायी बंकर बनाए गए हैं और VVIP मूवमेंट वाले इलाकों में पुलिस की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने 'ऑपरेशन कवच' के तहत सुरक्षा रिहर्सल की है, जिसमें करीब 100 कमांडो ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी खतरे से निपटने के लिए एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।
ट्रैफिक डायवर्जन और दफ्तरों में अवकाश
सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक योजना तैयार की है। शहर में 22 डायवर्जन पॉइंट चिन्हित किए गए हैं और 35 से अधिक सड़कों पर ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि विदेशी मेहमानों के ठहरने के लिए नौ होटल तय किए गए हैं, जहां से भारत मंडपम तक जाने वाले रास्तों पर लगातार कारकेड रिहर्सल की जा रही है।
प्रशासनिक कामकाज पर भी इसका असर दिखेगा। दिल्ली हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतें 11 सितंबर को बंद रहेंगी, जबकि ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी अवकाश रहेगा। इस प्रकार निचली अदालतों में शुक्रवार से रविवार तक लगातार तीन दिन कामकाज ठप रहेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार और एमसीडी के कार्यालय भी 11 सितंबर को बंद रहेंगे, हालांकि अस्पताल और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
अंतरिक्ष सहयोग और आर्थिक एजेंडा
शिखर सम्मेलन में अंतरिक्ष सहयोग के लिए एक स्थायी संस्थागत ढांचा बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सदस्य देशों के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नेटवर्क को आपस में जोड़ने और 'ब्रिक्स स्पेस काउंसिल' के गठन को लेकर सहमति बन सकती है। इससे सदस्य देशों को आपदा प्रबंधन, बाढ़ और चक्रवात जैसी स्थितियों में एक-दूसरे के उपग्रह डेटा का लाभ मिल सकेगा। भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा अवसर हो सकता है।
आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिक्स देश डिजिटल करेंसी के माध्यम से आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर जैसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, कोई नई साझा मुद्रा शुरू नहीं की जाएगी, लेकिन सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में सीधे लेनदेन करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
समूह का विस्तार और भविष्य की राह
2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के गठबंधन से शुरू हुआ यह समूह आज 11 पूर्ण सदस्य देशों तक पहुंच चुका है। दक्षिण अफ्रीका के 2011 में जुड़ने के बाद इसे ब्रिक्स नाम मिला। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के शामिल होने के बाद समूह का प्रभाव और अधिक बढ़ गया है। जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने से यह वैश्विक कूटनीति में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरा है।
सम्मेलन में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी को असुविधा न हो। सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य जोर इस बात पर है कि वैश्विक स्तर के इस आयोजन को बिना किसी बाधा के संपन्न कराया जाए।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!