दमोह: वर्दी में रील बनाकर चर्चा में आईं महिला पुलिस अधिकारी, वीडियो वायरल होने के बाद जांच के आदेश
दमोह देहात थाना क्षेत्र की जबलपुर नाका चौकी प्रभारी प्रियंका पटेल का एक वीडियो सोमवार दोपहर सामने आया है। इस वीडियो में वह पुलिस की वर्दी पहने हुए दिखाई दे रही हैं, जिस पर एक संदेश लिखा है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

वर्दी की मर्यादा पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में पुलिस विभाग से जुड़ी एक महिला अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दमोह देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जबलपुर नाका चौकी की प्रभारी प्रियंका पटेल का यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वह पुलिस की वर्दी पहने हुए एक कुर्सी पर बैठी नजर आ रही हैं, जिसके साथ एक विवादास्पद संदेश भी लिखा गया है।
वीडियो के ऊपर लिखे संदेश में कहा गया है, 'खुद की समस्याएं सुलझ नहीं रही और नौकरी दूसरों की समस्या सुलझाने वाली कर ली।' यह रील कब और किस परिस्थिति में बनाई गई थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन वर्दी में इस तरह के संदेश के साथ वीडियो बनाना विभाग के अनुशासन और आचरण नियमों के दायरे में सवालों के घेरे में आ गया है।
अधिकारियों ने लिया संज्ञान, जांच के निर्देश
मामला संज्ञान में आते ही पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। दमोह के एडिशनल एसपी सुजीत सिंह भदोरिया ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि चौकी प्रभारी का वायरल वीडियो उनके ध्यान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
एडिशनल एसपी ने जोर देकर कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने व्यवहार और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर सख्त निर्देश दिए जाते हैं। वर्दी में ऐसी कोई भी रील या सामग्री साझा करना, जो अनुशासनहीनता को दर्शाती हो या विभाग की छवि को प्रभावित करती हो, आपत्तिजनक माना जाता है। व्यक्तिगत गतिविधियों के लिए वर्दी का उपयोग करना नियमों का उल्लंघन है।
अधिकारी का अब तक का सफर
प्रियंका पटेल की तैनाती की बात करें तो उन्हें करीब चार महीने पूर्व ही जबलपुर नाका चौकी का प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले वह दमोह कोतवाली में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान उनका स्थानांतरण विभिन्न स्थानों पर हुआ है। कोतवाली से उन्हें पुलिस लाइन भेजा गया था, जिसके बाद उन्हें गैसाबाद थाने की जिम्मेदारी दी गई थी। गैसाबाद से हटाकर ही उन्हें वर्तमान पद पर तैनात किया गया था।
पुलिस विभाग में सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के बीच इस तरह के मामले अक्सर विवाद का कारण बनते हैं। पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों पर गरिमा बनाए रखें। अब देखना यह होगा कि विभागीय जांच में इस मामले को किस तरह से देखा जाता है और क्या अधिकारी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल, इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और सोशल मीडिया के प्रति अधिकारियों की संवेदनशीलता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अनुशासन ही पुलिस बल की सबसे बड़ी ताकत है और इसका पालन करना हर स्तर पर अनिवार्य है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!