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दमोह जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: एक्सपायर दवाएं मिलने पर दो कर्मचारी सस्पेंड

दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई, जहां कई एक्सपायर हो चुकी दवाएं मिलीं और कई फ्रीजर बंद पाए गए, जिनमें दवाएं रखी थीं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
दमोह जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: एक्सपायर दवाएं मिलने पर दो कर्मचारी सस्पेंड
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मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान एक्सपायर हो चुकी दवाएं पाई गईं, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

औचक निरीक्षण में खुली पोल

दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार सुबह 10 बजे जिला अस्पताल के दवा स्टोर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें स्टोर रूम में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। कई ऐसी दवाएं मिलीं जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी, इसके बावजूद उन्हें स्टोर में रखा गया था। साथ ही, दवाएं सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ्रीजर भी बंद पाए गए, जिससे दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

निरीक्षण के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर है। छह प्रकार की दवाओं के स्टॉक में विसंगतियां पाई गईं। इसके अलावा, वर्ष 2025 के तीन और वर्ष 2026 के 39 डिमांड पत्र लंबे समय से लंबित पड़े थे, जिससे साफ जाहिर होता है कि दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।

ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं का संकट

कलेक्टर ने बताया कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। जब उन्होंने डॉक्टरों से बात की, तो पता चला कि डिमांड भेजने के बावजूद दमोह स्थित मुख्य स्टोर से दवाएं समय पर नहीं पहुंच रही हैं। इस कारण गरीब मरीजों को मजबूरन बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति में 24 घंटे से अधिक की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने स्टोर रूम के दो जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ कार्यालय में भी मिली अनुपस्थिति

अस्पताल के बाद कलेक्टर ने सीएमएचओ कार्यालय का भी निरीक्षण किया। वहां की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। कार्यालय में 16 अधिकारी और कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित मिले। इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का तीन दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।

निरीक्षण के दौरान एक पीड़ित परिजन पुष्पेंद्र राठौर ने कलेक्टर के सामने अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही का मुद्दा उठाया। उसने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उसकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई थी। उसने दावा किया कि उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सों ने समय पर इलाज नहीं किया। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने सिविल सर्जन को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर ने कहा है कि वे दोबारा औचक निरीक्षण करेंगे और यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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