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नौकरी के नाम पर साइबर जालसाजों का जाल: 93 प्रतिशत युवाओं को मिल रहे फर्जी जॉब ऑफर

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
नौकरी के नाम पर साइबर जालसाजों का जाल: 93 प्रतिशत युवाओं को मिल रहे फर्जी जॉब ऑफर
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बेरोजगार युवाओं के लिए बढ़ता साइबर खतरा

देश में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए साइबर ठग एक बड़ी मुसीबत बनकर उभरे हैं। हालिया सर्वे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जिनमें सामने आया है कि करीब 93 प्रतिशत नौकरी चाहने वालों को किसी न किसी स्तर पर फर्जी जॉब ऑफर का सामना करना पड़ा है। डिजिटल युग में बढ़ती भर्ती प्रक्रियाओं के बीच, असली और नकली जॉब ऑफर के बीच अंतर करना उम्मीदवारों के लिए एक कठिन चुनौती बन गया है।

एक प्रमुख भर्ती मंच द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 1,161 भारतीय कर्मचारियों को शामिल किया गया। इस अध्ययन से पता चला कि साइबर अपराधी अब नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। वे अक्सर फर्जी जॉब पोर्टल, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेते हैं, जिससे युवाओं का भरोसा डगमगा रहा है।

मानसिक और आर्थिक नुकसान का दंश

नौकरी के नाम पर होने वाली इस धोखाधड़ी का असर केवल पैसों के नुकसान तक सीमित नहीं है। सर्वे के अनुसार, 31 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि फर्जी प्रस्तावों के कारण उनका कंपनियों और नियोक्ताओं पर से भरोसा कम हो गया है। वहीं, 19 प्रतिशत उम्मीदवार इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भारी तनाव और चिंता का शिकार हुए। स्थिति इतनी गंभीर है कि 14 प्रतिशत लोगों ने तो ठगी के डर से असली और वैध नौकरी के अवसरों को भी छोड़ दिया।

हालांकि आर्थिक नुकसान की बात 3 प्रतिशत लोगों ने ही स्वीकार की, लेकिन इसका व्यापक प्रभाव सामाजिक और मानसिक स्तर पर अधिक देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो यह न केवल युवाओं के करियर को प्रभावित करेगा, बल्कि कंपनियों की साख पर भी गहरा असर डालेगा।

कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा के उपाय

आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल आईडी की गहन जांच करना अनिवार्य है। एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी इंटरव्यू से पहले किसी भी प्रकार की रजिस्ट्रेशन या जॉइनिंग फीस की मांग नहीं करती है। यदि कोई रिक्रूटर पैसे की मांग करता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध माना जाना चाहिए।

उद्योग जगत के जानकारों का सुझाव है कि कंपनियों को अपनी भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा। आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और सत्यापित रिक्रूटर्स के माध्यम से ही भर्तियां की जानी चाहिए। कंपनियों को अपनी भर्ती प्रोफाइल को प्रमाणित करना चाहिए ताकि उम्मीदवार सुरक्षित महसूस कर सकें और उनके मन में कंपनियों के प्रति विश्वास बना रहे।

भविष्य की राह और सतर्कता

डिजिटल भर्ती के दौर में सतर्कता ही बचाव का एकमात्र तरीका है। आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स और सेवा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भर्तियां हो रही हैं, जिसका लाभ उठाकर साइबर ठग सक्रिय हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और रिक्रूटर की पहचान की पुष्टि किए बिना अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

अंततः, भर्ती प्रक्रिया में भरोसे की कमी को दूर करने के लिए नियोक्ताओं और नौकरी चाहने वालों दोनों को मिलकर काम करना होगा। स्पष्ट चयन प्रक्रिया और आधिकारिक संचार माध्यमों का उपयोग ही इस बढ़ते जॉब स्कैम को रोकने में प्रभावी साबित हो सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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