साइबर ठगी का शिकार होने पर न घबराएं, 'गोल्डन आवर' में 1930 पर करें कॉल
साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। पैसे कटने की स्थिति में सबसे पहले 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं और 24 घंटे के अंदर साइबर थाने में आवेदन दें।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट का जाल
मुजफ्फरपुर सहित पूरे देश में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। ठग अब नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। कभी अश्लील वीडियो कॉल के जरिए ब्लैकमेलिंग (सेक्सटॉर्शन) की जा रही है, तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर घंटों तक लोगों को बंधक बनाकर रखा जा रहा है। इन मामलों में पीड़ितों को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई भी कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। अपराधी अक्सर संदिग्ध बैंक खातों या आतंकी गतिविधियों में नाम आने का डर दिखाकर लोगों को मानसिक दबाव में लेते हैं और उन्हें लगातार निगरानी में रखने का नाटक करते हैं।
पैसे कटने पर 'गोल्डन आवर' का करें उपयोग
साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण समय ठगी के तुरंत बाद का होता है, जिसे 'गोल्डन आवर' कहा जाता है। डीएसपी ने सलाह दी है कि जैसे ही खाते से पैसे कटें, पीड़ित को बिना देरी किए तत्काल 1930 नंबर पर कॉल करना चाहिए। इस समय पर शिकायत दर्ज कराने से ट्रांजेक्शन को बीच में ही रोकने और रकम को सुरक्षित करने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि 1930 पर संपर्क न हो पाए, तो पीड़ित को तुरंत cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा, घटना के 24 घंटे के भीतर स्थानीय साइबर थाने में लिखित आवेदन देना अनिवार्य है। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन का विवरण, मोबाइल नंबर, चैट के स्क्रीनशॉट और संदिग्ध लिंक जैसे साक्ष्य संलग्न करना जांच में बेहद मददगार साबित होता है।
सेक्सटॉर्शन और ब्लैकमेलिंग से कैसे बचें
सोशल मीडिया पर 'एंजेल प्रिया' जैसी फर्जी आईडी बनाकर लोगों को दोस्ती के जाल में फंसाया जा रहा है। वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्डिंग करके उसे अश्लील रूप देकर ब्लैकमेल करना आम हो गया है। डीएसपी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति का शिकार हो जाए, तो उसे घबराने या अपराधी की मांगों के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। अपराधी को एक भी रुपया न दें और न ही उनसे मोलभाव करें।
पीड़ित को चाहिए कि वह धमकी भरे संदेशों, यूजर आईडी और यूआरएल के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखे। चुप रहने से अपराधी का हौसला बढ़ता है, जबकि समय पर पुलिस को सूचित करने से कार्रवाई संभव हो पाती है। याद रखें कि आप अपराधी नहीं, बल्कि एक अपराध के शिकार हैं, इसलिए सामाजिक शर्म के बजाय कानूनी मदद को प्राथमिकता दें।
सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता
साइबर अपराधी हमेशा 'जल्दबाजी' का माहौल बनाते हैं। 'तुरंत भुगतान करें', 'खाता बंद हो जाएगा' या 'गिरफ्तारी होगी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके वे पीड़ित को सोचने का मौका नहीं देते। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके (APK) फाइल को डाउनलोड न करें और न ही किसी के दबाव में आकर अपनी निजी जानकारी साझा करें।
अंत में, साइबर डीएसपी ने लोगों से अपील की है कि वे डर और लालच से दूर रहें। यदि आप किसी भी अनचाहे कॉल या संदेश पर रुककर सोचेंगे और पुलिस से संपर्क करेंगे, तो अधिकांश साइबर अपराधों को होने से पहले ही रोका जा सकता है। जागरूकता ही इस डिजिटल युग में सुरक्षा का सबसे बड़ा कवच है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!