चित्रकूट: घुटनों तक भरे पानी से गुजरकर स्कूल जाने को मजबूर मासूम, वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल
चित्रकूट। पहाड़ी ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय नोनार में मंगलवार सुबह बच्चे जलभराव के बीच से होकर स्कूल पहुंचते दिखाई दिए। विद्यालय तक जाने वाले रास्ते पर घुटनों से ऊपर तक पानी भरा होने के बावजूद बच्चे जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करते नजर आए।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

जान जोखिम में डालकर शिक्षा की राह
चित्रकूट जिले के पहाड़ी ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नोनार में शिक्षा हासिल करने के लिए बच्चों को हर दिन एक कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। भारी बारिश के बाद विद्यालय तक जाने वाला करीब 300 मीटर का रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो गया है। मंगलवार सुबह सामने आए एक वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे घुटनों से ऊपर तक भरे पानी के बीच से होकर स्कूल जाते हुए दिखाई दिए, जो प्रशासन की लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह वीडियो मंगलवार सुबह करीब 8 बजे का बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पानी का बहाव तेज है और बच्चे बेहद सावधानी से एक-दूसरे का सहारा लेकर रास्ता पार कर रहे हैं। इस दौरान किसी भी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि फिसलन और तेज बहाव छोटे बच्चों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।
ग्रामीणों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय मुख्य मार्ग से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर हैं, जिसका सीधा असर संपर्क मार्गों पर पड़ा है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर महसूस कर रहे हैं, लेकिन शिक्षा के प्रति बच्चों की लगन और स्कूल की अनिवार्यता के चलते उन्हें मजबूरन इस जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव की इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार के सदस्य बेहद चिंतित हैं और वे चाहते हैं कि जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए।
शिक्षकों ने भी उठाए अवकाश को लेकर सवाल
विद्यालय के शिक्षकों ने भी बच्चों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि जब पड़ोसी जिलों जैसे बांदा और कौशांबी में भारी बारिश के मद्देनजर स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है, तो चित्रकूट में प्रशासन ने अब तक ऐसा निर्णय क्यों नहीं लिया? शिक्षकों का मानना है कि खराब मौसम और जलभराव के बीच बच्चों को स्कूल बुलाना जोखिम भरा है और इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के कई अन्य संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नोनार प्राथमिक विद्यालय का यह मामला अब जिले के प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों में अवकाश की घोषणा करेगा या फिर जलभराव से राहत दिलाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
प्रशासनिक रुख का इंतजार
फिलहाल, स्थानीय लोग और अभिभावक प्रशासन के अगले आदेश का इंतजार कर रहे हैं। बारिश का दौर जारी रहने की संभावनाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि जल्द ही कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों ही खतरे में बनी रहेगी। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!